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UP: मथुरा में बाढ़ जैसे हालात..सड़कें बनीं तालाब, मंदिरों तक पहुंचा यमुना का पानी, लोगों ने छोड़ा घर; तस्वीरें

Tue, 19 Aug 2025 09:09 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा में यमुना उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इससे हालात विकराल होते जा रहे हैं। नदी किनारे के क्षेत्र पानी में डूब गए हैं। लोगों ने सुरक्षित स्थान की ओर जाना शुरू कर दिया है।
 
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यमुना का जलस्तर बढ़ने से डूब गए खेत। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ओखला और ताजेवाला बैराज से अधिक पानी छोड़ने से यमुना उफान पर है। वृंदावन, नौहझील, मांट, शेरगढ़ और मथुरा समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई गांव के लोगों का आवामगन बाधित हो गया है। जयसिंहपुरा और यमुना खादर में हालात ऐसे हैं कि करीब दो सौ से अधिक लोग घर छोड़कर चले गए हैं। वहीं कई क्षेत्रों के मठ-मंदिरों तक पानी पहुंच गया और सड़कें तालाब बन गई हैं। नौहझील क्षेत्र में हालात दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार कह रहे हैं कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, जबकि यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से महज 13 सेंटीमीटर ही कम है।

 
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सुरक्षित स्थान की ओर जाते लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना के जलस्तर में हर घंटे बढ़ोतरी हो रही है। बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 165.79 से बढ़कर 165.87 मीटर तक पहुंच गया है। यह खतरे के निशान 166.00 से महज 13 सेंटीमीटर ही कम है। खतरे का निशान पार होते ही यमुना से सटे इलाकों में पानी ही पानी नजर आएगा। 
 
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घरों पर लटका ताला। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हालांकि अधिकारी मंगलवार रात से जलस्तर घटने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हथिनीकुंड और ओखला बैराज से लगातार अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग अपर खंड एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया है कि मंगलवार को हथिनीकुंड से 39045 क्यूसेक और ओखला बैराज से 89223 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। 
 

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मथुरा में बढ़ा यमुना का जलस्तर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हथिनीकुंड और ओखला बैराज से प्रतिदिन कभी कम तो कभी ज्यादा मात्रा में पानी छोड़े जाने से मथुरा में यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, जबकि गोकुल बैराज से करीब 82000 क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज हो रहा है।

 
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यमुना का जलस्तर बढ़ा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हालात यह हैं कि वृंदावन के परिक्रमा मार्ग, नौहझील के दर्जनों गांव, बलदेव, शेरगढ़, मथुरा के जयसिंपुरा और यमुना खादर की दर्जनों कॉलोनियों की सड़कें तालाब बन गई हैं। जयसिंहपुरा क्षेत्र के पार्षद राकेश भाटिया ने बताया है कि उनके क्षेत्र में यमुना का पानी आने से करीब दो सौ से अधिक परिवार घर छोड़कर चले गए हैं। 

 
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मथुरा में बाढ़ का खतरा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वहीं मांट के मानसरोवर स्थित राधारानी मंदिर तक पानी पहुंच गया है। यहां मंदिर के चारों तरफ पानी भरा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुना यहां से करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर है, लेकिन फिर भी पानी मंदिर तक आ गया है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं।

 
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मथुरा में उफान पर यमुना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीएम ने परखीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तैयारियां
डीएम चंद्रप्रकाश ने मंगलवार को अपनी टीम के साथ वृंदावन, छाता, नौहझील और शेरगढ़ समेत कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति परखी। डीएम ने बताया कि तीन दिन पहले हथिनीकुंड बैराज से एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यमुना का जल स्तर 165.87 के करीब है, जो स्थिर है। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। 

 

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मथुरा में उफान पर यमुना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कई गांव के संपर्क मार्ग बाधित होने से आवागमन के लिए स्टीमर चलाई गई हैं। साथ ही राजस्व और सिंचाई विभाग की टीम को जलमग्न होने से नष्ट हुई फसलों के सर्वे के लिए लगाया है। प्रभावित सभी किसानों को उचित मुआवजा और नुकसान की भरपाई शासन द्वारा की जाएगी।
 

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मथुरा में उफान पर यमुना। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कॉलोनियों में यमुना का पानी नहीं हुआ कम
यमुना के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है, जिससे निचले क्षेत्रों में लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। देवराह बाबा घाट के चारों ओर खेतों में पानी भर गया। यहां तक कि घाट पर जाने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं। पानीगांव, श्याम नगर व श्रीजी नगर और केशव नगर जैसे रिहायशी इलाकों में जलभराव अब भी बना हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि जिन इलाकों में पानी भर गया है, वहां प्रशासन की टीम राहत सामग्री उपलब्ध करा रही है। जबकि श्याम नगर और केशव धाम के लोगों का कहना है कि अभी तक कोई राहत सामग्री उपलब्ध नहीं हुई है। दोनों कॉलोनियों में 250 से अधिक घर प्रभावित हैं।

 

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गांव में घुसा यमुना का पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डीएम ने किया दौरा
वृंदावन के केसी घाट पर जिलाधिकारी सीपी सिंह ने दौरा किया। इस दौरान उन्होंने आसपास रहने वाले लोगों से बातचीत की और श्रद्धालुओं को भी नदी के पास न जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपनी तरफ से पूरी तैयारियां किए हुए है। पुलिस प्रशासन की टीम लगातार कार्य कर रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दौरा कर राहत सामिग्री पहुंचाई जा रही है। किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। लोगों से अपील की जा रही है कि वह भी नदी के आसपास न जाएं। अपनी जान को जोखिम में न डालें।

 

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सड़कों पर बह रहा यमुना का पानी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जलभराव वाले क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का होगा सर्वे
जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों में फसलों के नुकसान का सर्वे तीन विभागों के अधिकारी मिलकर करेंगे। इसमें एडीओ कृषि, लेखपाल राजस्व और फसल बीमा कंपनी के अधिकारी शामिल हैं। सर्वे के लिए टीम नौहझील, मांट और छाता में पहुंची। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट आने पर प्रभावित फसलों की असली तस्वीर सामने आ जाएगी।

 

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मथुरा में बाढ़ का खतरा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के बाद यमुना में पानी बढ़ने से यमुना किनारे बसे गांवों में पानी पहुंच गया है। इसके साथ ही खेतों में खड़ी खरीफ सीजन की फसल भी पानी में डूब गई है। विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जिले से निकल रही यमुना का जलस्तर अभी चेतावनी बिंदु के आसपास है। कई गांव में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

 
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मथुरा में बाढ़ जैसे हालात। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इससे धान, बाजरा, ज्वार, तिलहन समेत अन्य फसल पानी में डूब गई है। जलस्तर कम होने के बाद पता चला है कि फसलें पीली हो गई हैं या सड़ चुकी हैं। किसानों को राहत दिलाने के लिए अब नौहझील, मांट और छाता ब्लॉकों के गांव में फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू कराया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि नुकसान का सर्वे करने के लिए तीन सदस्यीय टीम लगाई गई है। टीम क्षेत्र में भ्रमण कर नुकसान का आकलन करेगी।

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