उत्तर प्रदेश के मथुरा में बाढ़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। यमुना का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है। डीएम और एसएसपी रविवार को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे।
मथुरा और वृंदावन में बाढ़ के चलते हालात भयावह होते जा रहे हैं। रविवार को जलस्तर और बढ़ने से बस्तियों की तरफ पानी काफी बढ़ गया है। लक्ष्मीनगर क्षेत्र की तिवारीपुरम कॉलोनी के साथ ही आसपास के आधा दर्जन गांवों में बाढ़ के हालात विकराल हो गए हैं। पूरे दिन यमुना का पानी सड़क पार कर कॉलोनियों में भरता रहा। सड़क पर बहाव इतना तेज था कि आवागमन में भी परेशानी हुई। वहीं आसपास के गांव ईसापुर, हंसगंज आदि में सात से आठ फीट तक पानी भर गया। यहां मकान एक मंजिल तक डूब गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने के लिए डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार को भी ट्रैक्टर को सहारा लेना पड़ा।
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मथुरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना नदी में बढ़ते जलस्तर के चलते वृंदावन की कई कॉलोनियां जलमग्न हो चुकी हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि प्रशासन को कई इलाकों से लोगों को बाढ़ राहत केंद्रों तक रेस्क्यू कर सुरक्षित पहुंचाना पड़ा है। हालांकि कई लोग अब भी अपने मकानों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं, वजह है मेहनत से बना आशियाना और उसमें रखा जिंदगी भर की कमाई से जुटाया सामान।
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श्याम कुटी कॉलोनी निवासी मोहन ने बताया कि वे अपने घरों को इसलिए नहीं छोड़ रहे, क्योंकि उन्हें डर है कि उनके सामान की चोरी हो सकती है। उन्होंने ये घर खून-पसीने से बनाए हैं, इन्हें कैसे यूं ही छोड़ देँ। उन्होंने यह भी बताया कि जिनके घरों में पानी भर चुका है, उन्होंने अब अपने घर की छतों को ही अस्थायी ठिकाना बना लिया है। सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है।
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मथुरा में बाढ़।
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इलाके में साफ पानी की आपूर्ति ठप है। बिजली न आने से नलकूप नहीं चल रहे हैं। ऐसे बारिश के पानी को ही जमा करके पीने को मजबूर हैं। टंकी और बाल्टियों में बारिश का पानी जमा कर लिया है, उसी को छानकर पी रहे हैं।
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मथुरा में बाढ़।
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नगर निगम के वार्ड जयसिंहपुरा और वृंदावन की कई कॉलोनियों में पांच फीट तक पानी भर गया है। गलियों में नाव चल रही है, घरों में भी पानी भर गया है। हालात इतने खराब हो गए हैं, कि लोगों को अपन घर छोड़ना पड़ रहा है।
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गणेश धाम कॉलोनी में रहने वाले आबिद बाढ़ के बाद भी अब तक घर में डटे थे। उन्होंने छत पर जरूरी सामान रख लिया था और, परिवार के साथ छत पर ही रह रहे थे। नीचे रखा सामान घर में पानी भरने से बर्बाद हो गया। शुक्रवार को पानी जब और बढ़ा तो परिवार की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने घर छोड़ने का निर्णय लिया। दो बोरियों में कपड़े और जरूरी सामान लेकर परिवार के साथ वे शेल्टर होम चले गए। घर से विदा लेने के दौरान उनकी आंखें नम थीं, लेकिन आखिर करते भी क्या करते।
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मथुरा में बाढ़।
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यह हाल किसी एक आबिद का नहीं है, बल्कि सैकड़ों आबिद ऐसे हैं, जिन्हें अपना मजबूरन अपना घर छोड़ना पड़ा। पूरी जिंदगी की मेहनत की कमाई से बना घर और उसमें जाम किया सामान बर्बाद होते देखे उनके अरमान तिल-तिल कर मर रहे हैं। उन्हें नहीं पता कि वे जब वापस लौटेंगे तो उनका घर बचेगा भी या नहीं। दरअसल जलभराव के चलते कई मकान धराशायी हो चुके हैं, अन्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
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बलदेव में खडैरा घाट पर यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। घाट किनारे बने शिव मंदिर तक पानी पहुंच गया है और श्मशान घाट पूरी तरह से डूब गया है। गोशाला में भी पानी घुस गया है। जिससे गायों के लिए संकट खड़ा हो गया है। चारों ओर पानी ही पानी दिखाई दे रहा है।
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वहीं बलदेव नगर व देहात क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों में श्मशान घाट पर अंत्येष्टि का भी संकट पैदा हो गया है। यमुना पल्ली पार जाने वाले गांवों का संपर्क टूट गया है। पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। नगर पंचायत व प्रशासनिक अफसरों द्वारा अभी तक कोई भी व्यवस्था यहां नहीं की गई है। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी व नगर पंचायत से लोगों के आने-जाने पर रोकथाम की व्यवस्था करने की मांग की है। ब्लाक प्रमुख प्रतीक सिंह भरंगर ने निरीक्षण कर लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग यमुना के बढ़ते हुए जलस्तर में न जाएं। यहां सेल्फी लेना अथवा पानी में हंसी-मजाक करना घातक हो सकता हैं।
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25 घंटे रही बिजली गुल
नौहझील क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों व ग्रामीणों पर बिजली कटौती ने संकट और गहरा दिया। शुक्रवार शाम 3 बजे से बंद हुई बिजली शनिवार शाम 4 बजे आई। पूरे 25 घंटे तक विद्युत आपूर्ति ठप रहने से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
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दरअसल, शुक्रवार को तेज बारिश के दौरान आकाश में तेज आवाज के साथ बिजली कड़की और इसके साथ ही पूरे क्षेत्र में बिजली सप्लाई ठप हो गई। विद्युत कर्मियों द्वारा शुक्रवार देर रात तक फाल्ट को ढूंढने का काम किया गया, मगर फाल्ट नहीं मिला। शनिवार सुबह 5 बजे से ही विद्युत विभाग के कर्मी लाइन दुरुस्त करने में फिर जुट गए। लगातार प्रयासों के बाद शनिवार शाम 4 बजे आपूर्ति बहाल हो सकी। एक ओर क्षेत्र में बाढ़ का पानी गांवों में तबाही मचा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर अंधकार ने ग्रामीणों की रातें और मुश्किल कर दी हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि बिजली न होने से पीने का पानी भी नहीं मिल सका। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि भविष्य में ऐसी आपात स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, ताकि बाढ़ और अंधकार दोनों से एक साथ न जूझना पड़े। एसडीओ लाल बहादुर सिंह ने बताया कि गांव जाफरपुर खादर में 33 केवी लाइन के इंसूलेटरों पर बिजली गिरने के कारण फुंक गए। कड़ी मशक्कत के बाद विद्युत आपूर्ति सुचारू हो सकी है।