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कलयुग में 'श्रवण कुमार' बनी बहू: सास की इच्छा को बनाया संकल्प, सिर पर बैठाकर की ब्रज 84 कोस परिक्रमा; VIDEO

Thu, 04 Jun 2026 07:56 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बलदेव

सार

परिक्रमा मार्ग पर जहां श्रद्धालुओं ने यह दृश्य देखा, भावुक हुए बिना नहीं रह सके। लोगों ने काजल चौधरी की सेवा भावना, त्याग व समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। कलयुग में बहू श्रवण कुमार बन गई है। 
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सास को सिर पर बैठाकर बहू ने की परिक्रमा - फोटो : अमर उजाला
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा में बलदेव में भक्ति, सेवा व समर्पण का एक ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। हरियाणा के पलवल जनपद के हताना गांव निवासी प्रसिद्ध लोक कलाकार व गायिका काजल चौधरी अपनी वृद्ध सास 95 वर्षीय चन्द्री देवी (चांदनी देवी) को सिर पर टब में बैठाकर ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर रही हैं। बलदेव पहुंचने पर भारी भीड़ जमा हो गई, सभी ने स्वागत सम्मान कर आशीर्वाद लिया। 

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सास चन्द्री देवी - फोटो : अमर उजाला
सास की इच्छा पूरी कर रही सपना
इस अनूठी मातृसेवा व समर्पण ने परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बन गई। चन्द्री देवी की वर्षों पुरानी इच्छा थी वह भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली ब्रजभूमि की चौरासी कोस परिक्रमा करें, बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य समस्याओं से पैदल यात्रा करना संभव नहीं था। बहू काजल चौधरी ने सास की इच्छा को संकल्प बना लिया। बड़े टब में सास को बैठाया सिर पर उठाकर पूरी परिक्रमा यात्रा करने का कठिन निर्णय लिया।
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परिक्रमा करती बहू - फोटो : अमर उजाला
सपना की हो रही श्रवण कुमार से तुलना
परिक्रमा मार्ग पर जहां श्रद्धालुओं ने यह दृश्य देखा, भावुक हुए बिना नहीं रह सके। लोगों ने काजल चौधरी की सेवा भावना, त्याग व समर्पण की मुक्त कंठ से सराहना की। कलयुग में बहू श्रवण कुमार बन गई है। श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति में बहू व सास के रिश्ते का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

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सपना चौधरी - फोटो : अमर उजाला
खूब मिल रहा सपना को सम्मान
परिक्रमा में काजल चौधरी सास के साथ श्री दाऊजी महाराज मंदिर पहुंचीं, भगवान श्री दाऊजी महाराज के दर्शन कर परिवार व श्रद्धालुओं के सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। बलदेव में स्वागत में नगरवासियों ने फूल-मालाओं व जयघोष से अभिनंदन किया। काजल चौधरी ने कहा श्री दाऊजी महाराज की नगरी में सम्मान व स्नेह मिला है, वह जीवनभर नहीं भूल पाएंगी। सास भी मां के समान होती है, प्रत्येक बहू को सास का सम्मान उसी तरह करना चाहिए वह अपनी मां का करती है। माता-पिता व बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
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सास चन्द्री देवी - फोटो : अमर उजाला
चारों ओर हो रही सपना की चर्चा
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं, काजल चौधरी ने सास को सिर पर बैठाकर पूरी की जा रही यह यात्रा श्रद्धा, सेवा, त्याग व पारिवारिक संस्कारों का उदाहरण बन गई है, चर्चा पूरे ब्रज क्षेत्र में हो रही है। यह भावनात्मक यात्रा समाज को बुजुर्गों के सम्मान, सेवा और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने का प्रेरणादायक संदेश दे रही है।
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