लखनऊ विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के अध्ययन दल ने दुधवा में तितलियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी पर सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण में करीब सवा सौ से ज्यादा तितलियों की नई प्रजातियों को चिह्नित किया गया है।
बाघ, हाथी और गैंडों के साथ कई अन्य दुर्लभ वन्यजीवों का ठिकाना दुधवा टाइगर रिजर्व तितलियों का भी बड़ा संसार आबाद किए हैं। देश में पाई जाने वाली तितलियों की 1500 प्रजातियों में से 180 प्रजातियां दुधवा में पाए जाने की पुष्टि वन्यजीव विशेषज्ञों ने की है। पहले यहां तितलियों की ज्ञात 45 प्रजातियां थीं। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में यहां तितलियों की सवा सौ से ज्यादा और प्रजातियों को चिन्हित किया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व में तितलियों की प्रजातियां बढ़ने के लिए यहां की समृद्ध जैव विविधता को प्रमुख कारण माना जा है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों पर शोध कर रहे वन्यजीव जीवविज्ञानी और आउटरीच प्रोग्रामर विपिन कपूर सैनी के साथ ही लखनऊ विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान विभाग के अध्ययन दल ने बीते महीनों में यहां तितलियों की विभिन्न प्रजातियों की मौजूदगी पर सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण के शुरुआती नतीजे दुधवा टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता व पारिस्थितिकी तंत्र और संरक्षण के बेहतर प्रयासों को दर्शाने वाले हैं।
विपिन कपूर सैनी बताते हैं कि अब तक दुधवा में तितलियों की 45 प्रजातियां ही पाए जाने की बात पता थी। सर्वेक्षण के दौरान यहां सवा सौ से ज्यादा और नई प्रजातियां मिली हैं। सैनी ने बताया कि इस सर्वेक्षण की कंपाइल रिपोर्ट बनाई जा रही है, जिसे जल्द ही दुधवा प्रशासन को सौंपा जाएगा।
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दुधवा में किया गया तितलियों पर सर्वे
- फोटो : दुधवा
लखनऊ विश्वविद्यालय की प्राणी विज्ञान विभाग की प्रोफेसर अमिता कनौजिया का कहना है कि पूरे तराई क्षेत्र की जैव विविधता बहुत ही समृद्ध है। इसमें दुधवा में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजातियों में उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है।
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पीले रंग की तितलियां
- फोटो : दुधवा
सर्वेक्षण के दौरान दुधवा में पाई गईं दुर्लभ प्रजातियां
वन्यजीव जीवविज्ञानी विपिन कपूर सैनी ने बताया कि दुधवा में नई दर्ज की गई तितलियों की प्रजातियों में कुछ दुर्लभ हें। इसमें कॉमन मॉर्मन, कॉमन माइन, कॉमन लाइम, टैनी कोस्टर, गौडी बैरन, स्ट्राइप्ड टाइगर, कॉमन टाइगर, ग्रे काउंट व कमांडोर शामिल हैं।
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रंग-बिरंगी तितली
- फोटो : दुधवा
इसलिए महत्वपूर्ण है तितलियों की प्रजातियों का बढ़ना
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि तितलियों को बेहतर जैव सूचक माना जाता है। ये जलवायु परिवर्तन के प्रति बहुत ही संवेदनशील होती हैं। इनका वास जहां होता है, उस स्थान को बहुत ही स्वस्थ वातावरण वाला माना जाता है। ऐसे में ये दुधवा की समृद्ध जैव विविधता का सूचक है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के एमडी डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि पिछले दिनों दुधवा टाइगर रिजर्व में तितलियों पर एक सर्वेक्षण हुआ था। इसमें 180 के करीब प्रजातियां यहां चिह्नित की गईं हैं। अभी सर्वे आगे भी चल रहा है, जिस कारण अंतिम सूची नहीं जारी हुई है। इसके साथ ही दुधवा में मकड़ियों की भी 52 प्रजातियां चिह्नित की गईं हैं।