फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनोखा शिव मंदिर: जहां मेंढक की पीठ पर विराजे हैं महादेव, खड़ी मुद्रा में नंदी महाराज; जानें इसका इतिहास

Sun, 09 Jul 2023 06:32 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
1 of 5
मेंढक मंदिर - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में ऐसा अनोखा शिव मंदिर है, जहां भगवान भोलेनाथ मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर ओयल कस्बे में मंडूक तंत्र और श्री यंत्र के आधार पर बना यह मंदिर अपनी अनूठी और अद्भुत वास्तु संरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के तत्कालीन शासकों ने करीब 200 साल पहले कराया था। 

लखीमपुर खीरी ही नहीं हिमालय की तलहटी में बसा पूरा तराई क्षेत्र शैव संप्रदाय का प्रमुख केंद्र था। यह क्षेत्र 11वीं सदी से 19वीं सदी तक चाहमान शासकों के आधीन रहा। चाहमान वंशी ओयल स्टेट के तत्कालीन शासक राजा बख्त सिंह ने करीब दो सौ साल पहले प्राकृतिक दैवी आपदाओं से अपनी प्रजा की रक्षा के लिए मंडूक तंत्र और श्री यंत्र पर आधारित अनोखे मंदिर का निर्माण शुरू कराया था। मंदिर राजा बख्त सिंह के उत्तराधिकारी राजा अनिरुद्ध सिंह के समय में बनकर पूरा हुआ। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक मंदिर का निर्माण 1860 से 1870 के बीच हुआ था।
विज्ञापन

2 of 5
मेंढक मंदिर - फोटो : Social media
इस शिव मंदिर की वास्तु परिकल्पना कपिला के एक महान तांत्रिक ने की थी। मुख्य मंदिर एक विशालकाय मेंढक की पीठ पर बना हुआ है। मेंढक का मुंह उत्तर की ओर है। पिछला हिस्सा दक्षिण की ओर और दो पैर पूर्व दिशा में और दो पैर पश्चिम की दिशा में दिखाई देते हैं। शिवलिंग पर अर्पित किया जाने वाला जल नलिकाओं के जरिए मेंढक के मुंह से निकलता है। यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी प्रसिद्ध है।
विज्ञापन

3 of 5
मेंढक मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मेंढक की पीठ पर काफी ऊंचा अष्टकोणीय चबूतरा है। गर्भ गृह में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। इस अष्टकोणीय चबूतरे का आकार श्री यंत्र जैसा है। सबसे ऊपर गर्भ गृह है। गर्भ गृह में सफेद संगमरमर का करीब तीन फिट ऊंचा अरघा है। जिस पर नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है। अरघे पर सहस्त्रदल कमल की आकृति बनी हुई है। गर्भगृह का द्वार पूरब की ओर है। गर्भगृह के बाहर परिक्रमा पथ भी बना है।

4 of 5
मेंढक मंदिर में खड़ी मुद्रा में स्थापित नंदी की प्रतिमा - फोटो : सोशल मीडिया

एकमात्रा ऐसा मंदिर जहां खड़ी मुद्रा में नंदी 

आम तौर से शिव मंदिरों में भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्ति बैठी मुद्रा में स्थापित होती है लेकिन ओयल के इस अद्भुत मेंढक शिव मंदिर में नंदी की प्रतिमा खड़ी मुद्रा में स्थापित है। बताया जाता है कि ओयल का मेंढक शिव मंदिर एकलौता ऐसा शिव मंदिर है, जहां नंदी खड़ी मुद्रा में स्थापित हैं। यह इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता है। मंदिर की देखरेख और रखरखाव का काम ओयल राजपरिवार के लोग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मेंढक मंदिर - फोटो : Social media

तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र है मेंढक मंदिर

तंत्र विद्या के अनुसार मेंढक सुख समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए दीपावली के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। भगवान शिव के साथ मेंढक की भी पूजा करते हैं। नवविवाहित जोड़े भी स्वस्थ संतान की कामना से यहां दर्शन पूजन के लिए आते हैं। मेंढक मंदिर में दीपावली के अलावा पूरे सावन माह और महाशिवरात्रि पर भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें