अगर आप जंगल की सैर करना चाहते हैं। स्वच्छंद विचरण करते बाघ, गैंडे और हाथियों को देखना चाहते हैं तो 15 जून से पहले दुधवा घूम सकते हैं। इसके बाद पर्यटन बंद हो जाएगा। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पर्यटन सत्र के समापन की निर्धारित तिथि यही है।
दुधवा नेशनल पार्क के द्वार 15 जून से सैलानियों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि अभी कोई आधिकारिक पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन दुधवा के पर्यटन सत्र को बंद करने की यही तिथि निर्धारित है। पिछले साल में इसको बढ़ाकर 25 जून किया गया था। अगर आप अलौकिक वातावरण व स्वच्छंद विचरण करते वन्यजीवों का दीदार करना चाह रहे हैं तो 15 जून से पहले प्लान बना लें। क्योंकि 15 जून से अगर इसके पर्यटन सत्र का समापन होता है तो उसके बाद नवंबर में भी ही दुधवा पार्क सैलानियों के लिए खोला जाएगा। अब ऐसे में रोमांच व वन्यजीवों का खुले घूमते नजारा देखना है तो 15 जून से पहले दुधवा पार्क की बुकिंग कराने के बाद जंगल सफारी कर वन्यजीवों का दीदार करने का लुत्फ उठाया जा सकता है।
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दुधवा नेशनल पर्क का मुख्य द्वार।
- फोटो : वन विभाग
किशनपुर बाघों के लिए है मुफीद
दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर रेंज हर बार बाघों की साइटिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहां लगातार बाघों का दीदार सैलानियों को होता है। ऐसे में यहां सैलानियों की भीड़ लगी रहती है। हालांकि इस पर्यटन सत्र में एक बाघिन के घायल हो जाने के बाद पार्क प्रशासन ने इस रेंज के कई रूटों पर पर्यटन करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन उसके बाद भी यहां लगातार बाघ देखे जा रहे हैं। दुधवा रेंज में भी बाघ दिखते हैं लेकिन दुधवा के बाघों के राजा व रानी किशनपुर रेंज में ही पाए जाते हैं।
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दुधवा में भालू
- फोटो : दुधवा
सोनारीपुर रेंज में भालू के भी हो रहे हैं दीदार
अगर आपको दुधवा नेशनल पार्क में भालू के दीदार करने हैं तो दुधवा जंगल सफारी का मजा लें। यहां दुधवा की सोनारीपुर रेंज में अधिकांश लोगों को भालू के दीदार हुए हैं। ऐसे में वह स्वच्छंद घूमते भालू को देखकर पहले तो आश्चर्यचकित होते हैं लेकिन बाद में फोटो व वीडियो बनाते हुए उसका आनंद भी उठाते हैं। पार्क बंदी के अंतिम दिनों में सोनारीपुर रेंज में अलग-अलग स्थानों पर सैलानियों को भालुओं के दीदार हो रहे हैं।
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दुधवा में विचरण करता जंगली हाथियों का झुंड।
जंगली हाथियों के झुंड भी बने हैं आकर्षण का केंद्र
दुधवा नेशनल पार्क रेंज में जंगली हाथियों का झुंड भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बताया जाता है कि नेपाल से अक्सर जंगली हाथियों के झुंड यहां आ जाते हैं और यहां प्रवास करने के बाद वापस चले जाते हैं। इस बार भी दुधवा में कई जगहों पर जंगली हाथियों के झुंड सैलानियों को दिखे हैं। हालांकि गाइड व जिप्सी चालक झुंड सामने आने के बाद सतर्क हो जाते हैं और किसी तरह से झुंड को वाहन न दिखे, इसके प्रयास करते हैं। हालांकि अभी तक केवल झुंड दिखाई दिए हैं और उनसे नुकसान होने की बात सामने नहीं आई है।
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दुधवा में विचरण करते गैंडे।
- फोटो : वन विभाग
गैंडा साइटिंग सैलानियों को करती है रोमांचित
दुधवा नेशनल पार्क में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है। इसके लिए पार्क प्रशासन की तरफ से दो गैंडा परियोजनाएं भी चलाईं जा रही हैं। तार फैंसिंग वाले बाड़ों में यह परियोजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा पार्क प्रशासन द्वारा कुछ गैंडों को स्वच्छंद विचरण कर बाड़े से भी मुक्त किया गया है। जो अक्सर कहीं न कहीं पार्क क्षेत्र में सैलानियों को दिख जाते हैं। हाथी पर बैठकर गैंडा साइटिंग करना सैलानियों को खूब भाता है और इसका वह जमकर लुत्फ भी उठाते हैं। गैंडा साइटिंग बाघ देखने के बाद सैलानियों की दूसरी पसंद बनता जा रहा है। जिसके चलते सैलानियों दुधवा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
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दुधवा जंगल में बाघिन संग अठखेलियां करते शावक।
- फोटो : वन विभाग
अब तक 51 हजार से अधिक सैलानी आए
दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन सत्र 2024-25 की बात करें तो दुधवा में इस बार 50964 देसी व 628 विदेशी सैलानियों ने पार्क का भ्रमण किया। इसमें दुधवा नेशनल पार्क को तीन करोड़ 17 लाख 11 हजार 704 रूपए का राजस्व मई माह तक प्राप्त हुआ है। हालांकि अभी जून माह का ब्यौरा पार्क प्रशासन को नहीं मिल सका है। महीनों के हिसाब से देखा जाए तो मार्च, अप्रैल में विदेशी सैलानियों की अच्छी खासी आमद हुई है।
दुधवा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रंगाराजू टी. ने बताया कि अभी फिलहाल 15 जून को ही दुधवा के बंद होनी की तिथि है और उच्च अधिकारियों की तरफ से भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस बार हर पर्यटन सत्र की तुलना में दुधवा में अधिक सैलानी आए और पार्क को अच्छा राजस्व भी मिला है। उम्मीद है कि 15 जून तक सैलानी आते रहेंगे और कुछ लोगों ने अपनी एडवांस बुकिंग भी करा ली है। ऐसे में पार्क प्रशासन भी बेहतर व्यवस्था देने के लिए लगा हुआ है।