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राजस्थान से पैदल चल पांच दिन बाद कानपुर पहुंचा युवक, याद आ रहे थे घरवाले, पैरों में पड़े छाले

Sun, 29 Mar 2020 05:45 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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राजस्थान से पैदल चलकर कानपुर पहुंचे श्रीचंद्र - फोटो : amar ujala
हमारे पास खाने को कुछ भी नहीं बचा था। रुपये भी खत्म हो रहे थे। घरवालों की भी याद आ रही थी। ऐसे में घर लौटने का निर्णय लिया। 24 मार्च की सुबह राजस्थान के सीकर से करीब 600 किमी. दूर घर के लिए पैदल निकल पड़ा। पैरों में छाले पड़ गए हैं। हालांकि यूपी में प्रवेश करते ही लोगों ने खाने, पीने की सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराईं। यहां के लोगों जैसी दरियादिली रास्ते में कहीं और देखने को नहीं मिली।

 
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पैदल ही घरों को रवाना हुए लोग - फोटो : amar ujala
यह बातें कानपुर सजेती के रहने वाले श्रीचंद्र ने अमर उजाला से साझा कीं। श्रीचंद्र सीकर में एक टाइल्स बनाने वाले कंपनी में सुपरवाइजर हैं। काम धंधा बंद होने से घर लौटने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को वह अपने कानपुर के आसपास रहने वाले सात साथियों के साथ निकले थे। सीकर से करीब 80 किमी पैदल चलने के बाद सभी जयपुर पहुंचे।

 
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दूर से पैदल आए लोगों को खाने के पैकट दिए गए - फोटो : amar ujala
यहां रात बिताने के बाद 25 तारीख को पूरे दिन वाहन का इंतजार किया। 26 मार्च की सुबह पुलिस ने एक ट्रक की मदद से उन्हें आगरा छुड़वाया। इसके बाद वाहन का इंतजाम न होने के कारण सभी लोग कानपुर के लिए पैदल चल दिए। 28 मार्च की दोपहर श्रीचंद कानपुर बर्रा बाईपास के पास पहुंचे तो भावुक हो गए। बोले, खुशी इस बात की है कि वह अब जल्द ही अपने परिवार वालों के बीच होंगे।

 

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हाईवे पर पैदल ही पहुंचे लोग - फोटो : amar ujala
पुरान घी का कमाल है, घर पहुंच के ही दम लेब
बच्चा! पुरान घी का कमाल है, अब घर पहुंचकर ही दम लेब। यह कहना था 70 साल के बुजुर्ग मूलचंद का। वह मूलरूप से हमीरपुर के रहने वाले हैं। पेशे से मोची हैं। नोएडा में अकेले रहते हैं। लॉकडाउन के चलते वह अपने गांव के लिए साथी जयप्रकाश के साथ दो दिन पहले नोएडा से निकले थे। दोनों शनिवार को नौबस्ता चौराहे पहुंचे। जयप्रकाश ने बताया कि पैदल सफर के दौरान वह खुद हिम्मत हार गए थे। मूलचंद ने तब हौसला बढ़ाया। कुछ देर रुकने के बाद दोनों फिर हमीरपुर के लिए रवाना हो गए।

 
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दिल्ली से रिक्शे पर बिहार जा रहे लोग - फोटो : amar ujala
एक दूसरे का हौसला बढ़ाया
चार दिन पहले नोएडा से चलकर शनिवार सुबह 9 बजे बांदा के मारका गांव निवासी सुखलाल कानपुर पहुंचे। वह नोएडा में रहकर मजदूरी करते हैं। साथ में उनकी पत्नी पत्नी गोमती, बेटे सनी, मंटू, शिवा के अलावा रिश्तेदार शिवकरन, अजय, रामकरन, सुरेश थे। सुखलाल ने बताया कि किसी तरह यहां तक पहुंच गए। पैदल बांदा तक पहुंचने की अब हिम्मत जवाब दे रही। छांव के नीचे बैठे सभी एक दूसरे का हौसला बढ़ाते नजर आए।

ईश्वर के भरोसे घर को चले
दादा नगर में सीतापुर निवासी प्रताप और उनका भाई छोटू काम करता है। शनिवार को दोनों भाई करीब 147 किमी दूर अपने घर जाने के लिए ईश्वर का नाम लेकर पैदल निकल पड़े।
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