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एक संन्यासी से सीएम तक: जानिए कैसे रहे योगी सरकार के 100 दिन

Tue, 27 Jun 2017 09:32 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
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जनाकांक्षाओं और उम्मीदों का भारी बोझ लादे सत्ता में आई उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अगले हफ्ते अपने कार्यकाल के 100 दिन पूरे करने जा रही है।इस अर्से में योगी सरकार को तमाम चुनौतियों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। सरकार का नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। सीएम योगी ने यहां तक का ये सफर किन हालातों में तय किया है ये कम ही लोग जानते होंगे। हम अपने पाठको को बताएंगे एक संन्यासी से सीएम तक योगी का ये सफर कैसा रहा।  
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योगी के समक्ष आने वाली बड़ी चुनौतियां

योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
पहले नाथ सम्प्रदाय के अगुवा, फिर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी और फिर भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ, जो अब महंत ही नहीं प्रदेश के नए मुखिया भी बन गए हैं ढेरों मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। इन कारणों से वे सदा विपक्ष के निशाने पर रहते हैं।

योगी के समक्ष आने वाली बड़ी चुनौतियां
इनमें सबसे बड़ी चुनौती सूबे की कानून-व्यवस्था और किसानों की कर्जमाफी रही जिसको लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर निशाना साधता रहा है। बावजूद इसके सूबाई सरकार ने घुटने नहीं टेके। किसानों की कर्जमाफी भाजपा का अहम चुनावी मुद्दा था। केंद्र सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलने के बीच अचानक आये 36 हजार 369 करोड़ रुपये के इस बोझ को उतारने के लिये वित्त विभाग तरकीबें ढूंढ रहा है। वहीं सातवें वेतन आयोग को लागू करने में आने वाला 34 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार भी सरकार को उठाना है।

डेमो
प्रदेश में गड्ढा मुक्त सड़कें बनाने की चुनौती
इसके अलावा, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जैसी मेगा परियोजनाओं के लिये धन उपलब्ध कराना भी सरकार के लिये बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट आदेशों के बावजूद राज्य सरकार 15 जून तक केवल 63 प्रतिशत सड़कों को ही गड्ढामुक्त कर सकी है। अब सरकार के सामने विद्यार्थियों को नि:शुल्क लैपटाप बांटने की भी चुनौती है।

थाने का निरिक्षण करते सीएम योगी
कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती
कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के वादे के साथ प्रदेश की सत्ता में आयी योगी सरकार के गठन के बाद आपराधिक वारदात में बढ़ोत्तरी हुई है। खासकर सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष से सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति उन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कड़ी चुनौती है, जिन पर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक लिहाज से अतिसंवेदनशील उत्तर प्रदेश में भाजपा की छवि को बेहतर बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
 
 

डेमो
'सबका साथ, सबका विकास' करने का वादा
मुख्यमंत्री योगी ने सत्ता संभालते ही प्रदेश से अपराध खत्म करने तथा 'सबका साथ, सबका विकास' करने का वादा किया था। हालांकि अब वह और उनके मंत्रिमण्डलीय सहयोगियों का कहना है कि उन्हें 'जंगल राज' वाला प्रदेश मिला था, जिसे सुधारने में समय लगेगा।


 

योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
विद्यार्थियों को लैपटाप देने का वादा
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में विद्यार्थियों को लैपटाप देने का वादा किया था लेकिन यह योजना कब और कैसे पूरी होगी  इस बारे में अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गयी है। राज्य सरकार जहां 'सबका साथ, सबका विकास' की बात कर रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सरकार का ढकोसला मात्र करार दे रहे हैं।
 
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बसपा सुप्रीमो मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
फब्तियां कस रहा विपक्ष
मायावती ने ये आरोप लगाया है कि मु्ख्यमंत्री क्षत्रिय वर्ग के है इसलिए प्रदेश में क्षत्रिय समाज के लोगों का कद तेजी से बढ़ रहा है। इससे ब्राह्मण समाज के लोगों को भी खतरा बढ़ गया है। 

सपा अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव योगी सरकार पर तंज करते हुए कहते हैं कि मौजूदा सरकार पूर्ववर्ती सपा सरकार के हर काम की जांच करा रही है। वह कुछ काम भी करेगी, या सिर्फ जांच ही कराती रहेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश किसानों की कर्जमाफी के योगी सरकार के फैसले पर भी उंगली उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार दरअसल किसानों की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रही है। योगी सरकार अपने 100 दिन के कार्यकाल पर हर विभाग की प्रगति रिपोर्ट जारी करेगी। इस वक्त पूरी प्रशासनिक मशीनरी 73 विभागों की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने में लगी है। इन्हें 'श्वेत-पत्र ' के रुप में जारी किया जाएगा।
 
हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि तीन महीने का समय किसी सरकार के लिये बहुत कम है। आमतौर पर इतनी कम अवधि की सरकार के पास दिखाने लायक कोई खास उपलब्धि नहीं होती।
 
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