यूपी के महोबा जिले में पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपड़ को लेकर अधिकारी कितने संजीदा है इसकी एक बानगी चरखारी में देखने को मिली। दो वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चरखारी में तालाब खुदाई का निरीक्षण कर तालाबों और सड़क के किनारे दो हजार पौधों को रोपित कराया था लेकिन अफसरों की लापरवाही से 50 फीसदी पौधे सूख गए है।
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जाली के अंदर लगे पौधे सूखे
- फोटो : अमर उजाला
विश्व पर्यावरण दिवस पांच जून को मनाया जाएगा। इस दौरान जगह जगह गोष्ठियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ी बाते भी होगी लेकिन जमीनी हकीकत कुछ अलग ही है। बुंदेलखंड की पठारी धरती को हरा भरा करने के लिए चार जून 2016 को प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेख यादव कस्बा चरखारी आए थे। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री जल संचय योजना का शुभारंभ करते हुए पौधरोपण किया था। मुख्यमंत्री ने स्वयं जयसागर तालाब के किनारे पीपल का पेड़ रोपित किया था। इसके अलावा दो हजार पेड़ों को वंसिया ताल, कोठी ताल, जय सागर, मलखन सागर, रपट तलैया आदि के किनारे रोपित कराए गए थे।
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पूर्व सीएम द्वारा रोपित कराए गए पौधे
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेड़ों की देखरेख की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के एक्सईएन एके सिंह को दी थी। कुछ समय तक तो सिंचाई विभाग ने पौधों की देखरेख के लिए एक कर्मचारी तैनात किया और ट्रीगार्ड लगवाए लेकिन बाद में पौधों की देखरेख बंद कर दी गई। जिससे पर्यावरण संरक्षण के लिए रोपित कराए गए 50 फीसदी पेड़ सूख गए। जो पेड़ सही है उन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे है।
पूर्व सीएम द्वारा रोपित कराए गए पौधे
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा रोपित किया गया पौधा अभी भी हराभरा नजर आ रहा है। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते पौधों के सूख जाने से तालाबों के किनारे लगाए गए ट्रीगार्ड नजर आ रहे है जबकि उनमें पौधे गायब है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण का मुख्यमंत्री का प्रयास अफसरों की लापरवाही से नाकाम साबित हो रहा है।