45 डिग्री तापमान में तंदूर जैसी तपती 9 ट्रेनों से सेंट्रल स्टेशन पर सोमवार को उतरे प्रवासी श्रमिकों का हाल बेहाल रहा। पानी की बोतल देखते ही लपक पड़े। जो ट्रेन के भीतर बैठे थे वह भी रेल प्रशासन से पानी के लिए गुहार लगा रहे थे। रेलवे ने हर कोच में पानी की बोतल पहुंचाई।
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रास्ते में खाना न पानी
- फोटो : amar ujala
अहमदाबाद और बंगलूरू आदि शहरों से कानपुर सेंट्रल पहुंची स्पेशल श्रमिक ट्रेन से उतरने वाले मजदूरों ने बताया कि रास्ते में खाना, पानी नहीं पानी। शहरों में काम बंद होने के बाद वहां कई रातें भूखे पेट सोना पड़ा। अब बाहर नहीं जाएंगे।
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कई बार तो भूखे पेट रहना पड़ा
- फोटो : amar ujala
अपने गांव में काम कर गुजर बसर कर लेंगे। फिलहाल कानपुर सेंट्रल पर उतरे प्रवासी श्रमिकों को पानी की बोतल और लंच पैकेट दिए गए। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद रोडवेज बसों से उनको गृह जनपद के लिए रवाना किया गया।
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अब दोबारा लौटकर नहीं जाएंगे
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कभी पड़ोसियों ने भरा पेट तो कभी भूखे पेट गुजारे दिन
अहमदाबाद से आई उन्नाव निवासी नीलू ने बताया पति सिलाई की दुकान में काम करते थे। राशन खत्म होने के बाद कभी पड़ोसियों ने पेट भरा तो कभी भूखे पेट ही सो गए।
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कभी पड़ोसियों ने भरा पेट तो कभी भूखे पेट गुजारे दिन
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घर से दो अर्थियां उठ गई, हम पहुंच नहीं पाए
प्रयागराज निवासी विनोद, पत्नी पूनम और बच्चे के साथ बंगलूरू से आए हैं। बताया कि काम बंद होने के बाद भूखे रहना पड़ा। घर में दादा और भतीजे की मौत हो गई और हम लोग नहीं पहुंच पाए।
बिस्कुट पैकेट और पानी की बोतल से 24 घंटे का सफर
अहमदाबाद से यात्रियों को सिर्फ एक बोतल पानी और बिस्कुट पैकेट मिला था। उसी के सहारे हमने कानपुर का सफर तय किया। रास्ते में ट्रेन कई जगह रुकी, लेकिन कहीं भी पानी या लंच पैकेट नहीं मिले।