इस बार कानपुर में कांग्रेस का क्या हाल होने वाला है, भाजपा ने अभी तक अपना टिकट क्यों नहीं फाइनल किया, देखो इस बार वोटिंग किसके पक्ष में जाने वाली है। चर्चा के ये अंश किसी चाय या पान की दुकान में पुरुषों के बीच होने वाली चुनावी चकल्लस के नहीं हैं बल्कि महिलाओं की किटी पार्टी या अन्य अवसरों पर छिड़ी राजनीतिक बहस के हैं। इसे सोशल मीडिया का प्रभाव कहें या कुछ और अब तक टीवी सीरियल देखकर मेकअप, कपड़े और साड़ियों पर चर्चा करने वाली महिलाओं ने राजनीति में रुचि लेना शुरू कर दिया है।
आमतौर पर पॉलिटिक्स से दूर मानी जाने वाली महिलाओं ने सियासी जंग में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दिया है। मोदी-राहुल की जुबानी जंग हो या बहनजी-अखिलेश का गठबंधन अब महिलाएं भी इसको गंभीरता से लेकर वोट देने की रणनीति तय कर रही हैं। अब घरों में टीवी सीरियल हटाकर न्यूज चैनल लगाने के लिए जंग नहीं होती। बल्कि महिलाएं भी इन मुद्दों पर मुखर हैं। अमर उजाला ने ऐसी ही कुछ महिलाओं से बात की तो दिलचस्प किस्से निकलकर सामने आए।
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बबिता कटियार
- फोटो : अमर उजाला
अब तो पीछे छूट गए सीरियल
सोशल मीडिया पर हूं। फेसबुक पर दिनभर पॉलिटिकल न्यूज के अपडेट पढ़ते-पढ़ते अच्छा लगने लगा। पति के साथ न्यूज देखने लगी। देश के विकास, बदलाव को देख और पढ़कर अच्छा लगा। अब तो शाम को चैनल पर न्यूज या डिबेट न देखूं तो अच्छा नहीं लगता। सीरियल तो पीछे छूट गए हैं। - बबिता कटियार
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डॉ. स्वाति सिंह
- फोटो : अमर उजाला
अब अपने विवेक से दूंगी वोट
जमाना बदल गया है। खुद को अपडेट रखना बेहद जरूरी है। चाहे पॉलिटिक्स हो, देश का विकास हो या बात हो फिल्म की। अब तो न्यूज के सारे सोर्स एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। कुछ समय पहले पॉलिटिक्स की बातें या खबरें बहुत बोर करती थीं। वोट किसे देना है, यह भी कोई और ही तय करता था। अब सब कुछ देख समझ कर वोट देना चाहती हूं। - डॉ. स्वाति सिंह
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पल्लवी बजाज
- फोटो : अमर उजाला
किटी पार्टी में भी पॉलिटिक्स
किटी पार्टी में भी भारतीय पॉलिटिक्स ने अपनी जगह बना ली है। जब तक किटी शुरू नहीं होती, तब तक बजाए कपड़ों या ज्वैलरी पर बहस करने के सियासी माहौल पर बातें होती हैं। थोड़ी देर ही सही, लेकिन पॉलिटिकल इश्यू भी डिस्कस होने लगे हैं। - पल्लवी बजाज
पॉलिटिक्स मतलब केवल वोट डालना नहीं
इस बार तो सभी सहेलियों ने तय किया है कि एक साथ वोट देने जाएंगी। पॉलिटिक्स का मतलब पहले मेरे लिए केवल वोट डालने तक ही सीमित था, लेकिन अब सोच बदली है। कुछ दोस्तों और सोशल मीडिया की वजह से अब पॉलिटिक्स में सीरियल से भी ज्यादा मजा आने लगा है। मोदी-राहुल की सियासी लड़ाई पर हम भी चटकारे लेते हैं। - रश्मि