कानपुर: हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलाजी) में डॉक्टरों ने बिना ऑपरेशन के दूरबीन विधि से हृदय के छेद को बंद करने की पहली सफलता पाई। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उमेश्वर पांडेय ने बताया कि दो वर्षीय बच्ची अलीशा के हृदय में 1.6 सेंटीमीटर का छेद था। इसके साथ ही आर्टियल से सेप्टल तक डिफेक्ट था।
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इसकी वजह से उसके हृदय के दो चैम्बरों में काफी दबाव रहता था। बच्ची की जान बचाने के लिए हृदय के छेद को बंद कर आर्टियल से सेप्टल तक डिफेक्ट को सही करना जरूरी था।
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उनकी टीम ने बिना ऑपरेशन किए दूरबीन विधि से सफल डिवाइस प्रोसीजर कर सफलतापूर्वक छेद को बंद कर दिया। ऐसा कार्डियोलॉजी में पहली बार हुआ।
टीम में डॉ. आरएन पांडेय, डॉ. एमएम रजी शामिल थे। संस्थान के निदेशक डॉ. विनय कृष्ण ने टीम को बधाई देते हुए बताया कि 24 घंटे बाद अलीशा की स्थिति बेहतर है।