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Vikas Dubey Kanpur News: चौंकाने वाला खुलासा, क्या फरार भाई को बचा रही है पुलिस, क्यों नहीं है एफआईआर में नाम

Tue, 11 Aug 2020 04:59 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे के भाई दीपक दुबे को पुलिस ने अभी तक बिकरू कांड में आरोपी नहीं बनाया है। जबकि वारदात में उसकी लाइसेंसी राइफल का इस्तेमाल हुआ था। इसके बावजूद पुलिस ने न नामजद एफआईआर दर्ज की और न ही अभी तक की विवेचना में उसका नाम जोड़ा है। वारदात के बाद से दीपक फरार है।

 
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विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
बिकरू कांड के बाद पुलिस ने विकास समेत 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसमें दीपक का नाम शामिल नहीं था। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला था कि वारदात में दीपक की सेमी ऑटोमैटिक राइफल का इस्तेमाल हुआ है। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक दीपक को आरोपी नहीं बनाया है। वहीं, लखनऊ पुलिस ने उस पर केस दर्ज कर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। लखनऊ पुलिस भी उसकी तलाश कर रही है।

 
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विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
दीपक की मौजूदगी के साक्ष्य नहीं
दीपक शातिर अपराधी है। विकास के साथ हर वारदात में वह शामिल रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दीपक को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। जबकि, उसकी राइफल का इस्तेमाल हुआ है तो साजिश रचने, आर्म्स एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में उसके खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए था। हालांकि पुलिस का दावा है कि वारदात की रात दीपक बिकरू में मौजूद था, इसके साक्ष्य नहीं मिले हैं। वहीं विकास से फोन पर बातचीत के भी सुबूत नहीं मिले हैं। इस कारण से भी अभी तक उसको आरोपी नहीं बनाया है। 

 

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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
हत्याओं में शामिल रहा है दीपक
प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय हत्याकांड में दीपक को उम्र कैद हुई है। वह जमानत पर बाहर है। भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या में भी वह विकास  के साथ शामिल था। 1998 में बिकरू गांव में पुलिस पर हुए हमले में भी वह आरोपी था। पुलिस की उस पर दरियादिली समझ से परे है।

 
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विकास दुबे - फोटो : amar ujala
क्या है पूरा मामला
बता दें कि दो जुलाई की रात को बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यूपी एसटीएफ ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास दुबे सहित उसके पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया था।

अभी तक पुलिस इस मामले में 15 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। विकास के एक साथी ने सरेंडर भी किया है। वहीं इस घटना में शामिल कई बदमाश अभी तक फरार चल रहे हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए यूपी एसटीएफ की कई टीमें लगी हुई हैं।

वारदात में दीपक दुबे की मौजूदगी के साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच जारी है। उसकी राइफल का इस्तेमाल हुआ है तो उसको आरोपी बनाया जाएगा।
डॉ. प्रीतिंदर सिंह, डीआईजी 

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