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CM योगी का गऊ प्रेम और सख्ती भी सिस्टम को सुधार पाने में नाकाम!, यहां गाय ‘मौत के हवाले’

Sat, 15 Apr 2017 07:04 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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सीएम योगी आदित्यनाथ के शासन को 20 दिन ही पूरे हुए हैं और अभी से उन पर उंगलिया उठनी शुरू हो गई है। फिलहाल, लोग दबी जुबान कहते सुने गए हैं कि शासन से लेकर प्रशासन तक के वादों और दावों को हवा निकल गई है। अाप भी जान लीजिए कहां और कैस सीएम के दावों की आलोचना हो रही हैं...   
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बांदा के अतर्रा में शासन से लेकर प्रशासन तक वादे और दावे कुछ भी हों, गायों के प्रति कोई संजीदा नहीं है। अतर्रा ग्रामीण के चौरिहन पुरवा की गोशाला उजाड़ होने को है। एसडीएम वादा कर भूल गए। जनप्रतिनिधियों को सुध ही नहीं है। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं।

 
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तर्रा ग्रामीण के चौरिहन पुरवा गोशाला में मवेशी।
सीएम योगी का गऊ प्रेम और सख्ती भी सिस्टम को सुधार नहीं पा रहा। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां चौरिहन पुरवा के ग्रामीण पिछले कई महीनों से अपने खर्च पर 300 गायों को जैसे-तैसे पाल रहे हैं। इलाज के अभाव और भूख से वहां 30 गायों की मौत भी हो चुकी है।

 

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‘अमर उजाला’ में ‘गौशाला बनी बूचड़खाना और भूख कसाई’ खबर छपी तो एसडीएम गौरव शुक्ला ने नायब तहसीलदार संजय कुमार को जांच सौंपी और मदद का भरोसा दिया। मदद तो दूर दोबारा कोई अधिकारी गौशाला झांकने तक नहीं गया। ऐसे में ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे रहा है।

 
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छुट्टी पर हूं, आते ही इंतजाम कराऊंगा 
उप जिलाधिकारी गौरव शुक्ला ने बताया कि गोशाला में बंद गाय-बछड़ों के लिए चारा-भूसा की व्यवस्था संबंधी जांच पूरी हो चुकी है। पत्रावली भी जिलाधिकारी को भेज दी गई। एसडीएम ने बताया कि वह छुट्टी में हैं, वापस आते ही गोशाला में बंद मवेशियों के लिए चारा-भूसा की व्यवस्था कराएंगे। यह भी बताया कि बीमार पशुओं के इलाज के लिए पशु चिकित्साधिकारी को अवगत करा दिया गया है। वह (एसडीएम) खुद टीम साथ लेकर गोशाला जाएंगे। 

 
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भूखों मरने से पहले छोड़ देंगे मवेशियों को
गोशाला संरक्षक शंभू त्रिपाठी ने कहा कि 300 गाय-बछड़ों का पेट भरना बहुत कठिन है। अब ग्रामीण भी मदद से हाथ खींचने लगे हैं। ‘राम’ भरोसे जब तक व्यवस्था हो रही है तब तक वह सेवा में जुटे हैं। अपनी नजरों के सामने मवेशियों को भूखों मरने नहीं देंगे। पुख्ता इंतजाम नहीं होता तो वह 15 दिन बाद सभी मवेशियों को आजाद कर देंगे। 


 
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