यूपी के कानपुर समेत आसपास के शहरों में पिछले 10 वर्षो की अपेक्षा इस बार फरवरी माह सर्वाधिक गर्म रहा। माघ माह में फाल्गुन जैसी गर्मी का अहसास हुआ। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ग्लोबल वार्मिंग की वजह से वातावरण में परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि इस बार फरवरी में उत्तराखंड सहित कई अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने की घटनाएं अधिक हुई हैं।
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कानपुर: बढ़ी गर्मी
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वर्ष 2011 से लेकर 2020 के बीच फरवरी में अधिकतम तापमान एक दो दिनों के बीच 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है। जबकि इस बार फरवरी में अधिकतम पारा करीब 6 बार 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर गया है।
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आखिरी दिन रविवार को यह सर्वाधिक 32.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के प्रमुख डॉ एसएन पांडे के अनुसार जलवायु परिवर्तन का असर अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। इसकी वजह से आने वाले समय में कभी अधिक गर्मी और कभी अचानक तेज ठंड होगी। इस बार गर्मी का सीजन पहले की अपेक्षा ज्यादा रह सकता है।
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फरवरी में अधिकतम तापमान डिग्री सेल्सियस में
2011 में 28
2012 में 30
2013 में 28.7
2014 में 30.2
2015 में 26
2016 में 25.6
2017 में 31.6
2018 में 30.4
2019 में 29.6
2020 में 30.5
2021 में 32.4
न्यूनतम तापमान भी बढ़ा
इस वर्ष फरवरी महीने के न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह बढ़त 15 तारीख से लेकर 28 तारीख के बीच ज्यादा रही है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का असर प्रदेश के मध्य क्षेत्र में अधिक रहा है। इसकी वजह से न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर गया है। रविवार को यह 16 डिग्री सेल्सियस रहा।