कानपुर में जाजमऊ के वाजिदपुर में हुए बवाल के आरोपियों को जिस चौकी इंचार्ज अनुराग सिंह की शह मिली थी उस पर एक सत्ताधारी विधायक का हाथ है। उसको अफसरों का भी खूब साथ मिला। यही वजह है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बावजूद उस पर सिर्फ लाइन हाजिर की कार्रवाई की गई है।
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वाजिदपुर बवाल
- फोटो : amar ujala
खुद को सिंघम कहने वाला ये दरोगा पुलिस के अफसरों पर भी भारी पड़ रहा है। जांच का हवाला देकर अफसर उसको बचाने का प्रयास कर रहे हैं। वाजिदपुर बवाल के आरोपियों के साथ दरोगा अनुराग सिंह की मिलीभगत उजागर हुई है। उसके नए पुराने कारनामों से पुलिस अफसर बखूबी वाकिफ हैं। इसके बावजूद उस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
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वाजिदपुर बवाल
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क्योंकि, उसको एक विधायक का संरक्षण मिला हुआ है। वहीं अन्य कई नेताओं से भी उसकी अच्छी बनती है। जब भी कोई कांड होता तो ये सब उसके पक्ष में आकर खड़े होते हैं और पैरवी करते हैं। जिसके बाद मामला रफादफा हो जाता है। बिठूर से लेकर बिधनू थाने का चार्ज दिलाने में इन सभी की भूरेमका रही। वहीं पूर्व एसएसपी अनंत देव की कृपा बरसी तो दो-दो बार एक ही चौकी पर तैनाती मिली।
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वाजिदपुर बवाल
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हाफ एनकाउंटर पर उठे थे सवाल
दो साल पहले जब अनुराग सिंह पनकी के एमआईजी चौकी का प्रभारी था तब उसने एक गुडवर्क किया था। जिसमें उसने बहादुरी दिखाने के लिए अपराधी से गोली चलवाई थी। अपराधी के हाथ कांप गए और गोली अनुराग को छूकर गुजर गई थी। बाद में उसके पैर में गोली लगी थी। आरोपी बदमाश के परिजनों ने आरोप लगाया था कि घर से ले जाकर मुठभेड़ दिखाई गई थी।
समझौते के नाम पर वसूली
टेनरी वालों से लेकर स्क्रैप कारोबारी दरोगा पर संगीन आरोप लगा चुके हैं। खासकर कई मामलों में दबाव बनाकर समझौते आदि के नाम पर उनसे वसूली की गई। कई मामलों में जांच की गई लेकिन अफसरों की कृपा उस पर बरसती रही। इसलिए कोई सख्त कार्रवाई उस पर नहीं की गई। अब डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह का कहना है कि जांच की जा रही है। अमर उजाला में प्रकाशित खबरों को भी आधार बनाया गया है। जांच पूरी होने के बाद उस पर कार्रवाई की जाएगी।