नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में देश भर में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच एक और खुलासा हुआ है। एसआईटी के मुताबिक पीएफआई (पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) प्रदर्शनकारियों को मोहरा बनाकर उनसे विद्रोह करवाने की साजिश रच रही है। सीएए के विरोध में शुरू में हुई हिंसक घटनाओं में पीएफआई पर्दे के पीछे व आगे दोनों तरफ थी लेकिन अब सिर्फ पीछे रहकर नापाक मंसूबों को कामयाब करने में जुटी है।
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पीएफआई के पांच सदस्य हुए थे गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
शहर में पकड़े गए पीएफआई के सदस्यों ने इसका खुलासा किया है।चमनगंज स्थित मोहम्मद अली पार्क समेत यूपी के कई शहरों और अलग-अलग प्रदेशों में सीएए के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। लगभग हर जगह प्रदर्शन में खासतौर पर महिलाएं शामिल हैं। पता चला है कि पीएफआई प्रदर्शनकारियों को मोहरा बनाकर देश भर में बवाल और हिंसा भड़काने में लगी है।
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कानपुर में हिंसा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इसका खुलासा बेगमपुरवा में पकड़े गए पीएफआई के सदस्यों मोहम्मद उमर, सैयद अब्दुल हई हाशमी, फैजान मुमताज, मोहम्मद वासिफ व सरवर आलम से पूछताछ के दौरान हुआ। एसआईटी को उनसे जुड़े कई और लोगों के बारे में जानकारी मिली है। ये भी पीएफआई के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस के अलावा सुरक्षा एजेंसियां भी उनकी तलाश में जुटी हैं।
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कानपुर में हिंसा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
इसलिए फंड जुटाने में लगे थे आरोपी
आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि पीएफआई सीएए के विरोध में खुलकर शामिल नहीं होना चाहती है। वह प्रदर्शन में शामिल कुछ खास लोगों को तलाश रही है ताकि उन्हें अलग-अलग प्रदर्शनों का प्रमुख बना सके। इनको मोटी रकम देने के लिए फंड भी जुटाया जा रहा है।
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कानपुर में हिंसा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
संगठन के पदाधिकारियों के संपर्क में थे आरोपी
लखनऊ पुलिस ने हिंसा में शामिल पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, कोषाध्यक्ष नदीम व मंडल अध्यक्ष अशफाक को 24 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। एसआईटी सूत्रों के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों की पदाधिकारियों से सीधी बातचीत होती थी। इनके मोबाइल नंबरों की सीडीआर से पुष्टि हुई है। कॉल, मैसेज व व्हाट्सएप पर मैसेज व कॉल से सीएए विरोध व हिंसा को लेकर तमाम सामग्री पुलिस को मिली है। एटीएस भी मामले की जांच शुरू कर दी है। इन सभी के मोबाइल जांच के लिए फोरेंसिक लैब भी भेजे जाएंगे।
पत्रकार बता ले रहा था जानकारी
शहर में 20 व 21 दिसंबर को हुई हिंसा के बाद पुलिस प्रशासन कार्रवाई में जुटा है। ऐसे में आरोपी मोहम्मद वसाफ खुद को पत्रकार बताकर पुलिस की कार्रवाई की जानकारी जुटा साथियों को दे रहा था। इसी के सहारे वह बचने के प्रयास में भी जुटा था।