बिकरू कांड को अंजाम देने के बाद विकास दुबे, प्रभात मिश्रा और अमर दुबे जय गुरुदेव के अनुयायी के कपड़े पहनकर फरार हुए थे। इस वजह से भी पुलिस और एसटीएफ तीनों आरोपियों को पहचानने में चूक गई थी। यह खुलासा पकड़े गए दहशतगर्दों के मददगारों से पूछताछ के बाद एसटीएफ ने किया है।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
ये कपड़े इन्हीं में से एक मददगार रामजी के पिता जी के थे। तीनों आरोपी कानपुर देहात के रसूलाबाद के तुलसीपुर गांव स्थित रामजी के घर कई घंटे तक रुके थे। एसटीएफ ने दहशतगर्दों के सात मददगारों को सोमवार को गिरफ्तार किया है।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
इनसे पूछताछ में पता चला है कि बिकरू कांड को अंजाम देने के बाद प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय ने तीन जुलाई को तड़के तीन से चार बजे के बीच शिवली निवासी दोस्त विष्णु कश्यप को फोन कर बुलाया। इसके बाद विष्णु अपने दोस्त छोटू की कार लेकर कैलई रोड तिराहा पहुंचा।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
प्रभात, विकास दुबे और अमर को विष्णु अपने जीजा रामजी के घर ले गया। यहीं से तीनों ने रामजी के पिता के जय गुरुदेव वाले कुर्ते पहने और शाम को करियाझाला में संजय परिहार की बगिया पहुंचे। इसके बाद अर्पित मिश्रा ने तीनों को अपने ट्यूबवेल में ठहराया।
देर शाम मंगलपुर निवासी शुभम पाल तीनों को अपने ठिकाने पर ले गया। पांच जुलाई की शाम तीनों जय गुरुदेव के अनुयायी वाले कपड़े पहने शुभम की कार से औरैया पहुंचे। इसके बाद दिल्ली और फरीदाबाद पहुंचे थे।