बिकरू गांव में बिजली, राशन और पुलिस से जुड़े मामलों में कुख्यात विकास दुबे के खिलाफ कोई भी ग्रामीण शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। पांच वर्षों में न संपूर्ण समाधान दिवस और न अन्य शिकायत पटलों पर किसी ने विकास दुबे की शिकायत दर्ज करवाई है। अगर कभी किसी ने शिकायत की भी तो विकास खुद सजा देता था।
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vikas dubey news
- फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले कमालपुर में रहने वाले भांजे की राशन दुकान का विवाद होने पर विकास दुबे और उसके गुर्गों ने तहसील आपूर्ति निरीक्षक चौबेपुर के साथ एक ढाबे में मारपीट की थी। यही हाल उसने राहुल तिवारी का किया जो जमीन संबंधी विवाद में चौबेपुर एसओ से उसकी शिकायत करने गया था। बिल्हौर तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि दो वर्ष से बिल्हौर में तैनाती हैं।
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इस दौरान विकास दुबे की न तो कोई शिकायत संपूर्ण समाधान दिवस में आई और न पुलिस थाना, विकास खंड कार्यालय में उसकी विरुद्घ कोई पत्र मिला। बिल्हौर आने से पहले तत्कालीन आपूर्ति निरीक्षक प्रशांत कुमार के साथ विवाद की जानकारी तो हुई थी, लेकिन मामला शांत हो गया। विकास दुबे की पत्नी जिस घिमऊ जिला पंचायत क्षेत्र सदस्य हैं, वहां पर घिमऊ-गड़रियन पुरवा से मकरंद निवादा तक विकास दुबे का खास ठेकेदार सड़क बनवा रहा है।
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उसके डंपरों ने धौरसलार रेलवे स्टेशन क्रासिंग समेत कई बैरिकेड तोड़े, फिर भी ग्रामीणों ने चुप्पी नहीं तोड़ी। वर्ष 2015 में शिवराजपुर ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान ब्लाक में रोक के बाद जब एक प्रत्याशी ने पर्चा खरीद लिया, तब भी उसके साथ मारपीट हुई। लेकिन न तो चुनाव अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया और न ही पीड़ित ने शिकायत करने की हिम्मत जुटा पाई।
बता दें कि बिकरू गांव में दो जुलाई की रात को विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस की टीम पर घातलगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ सहित आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर विकास दुबे के पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया। वहीं यूपी एसटीएफ ने विकास के 12 साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नौ जुलाई की सुबह उज्जैन से कानपुर लाते समय विकास की कार पलट गई। इस दौरान उसने सिपाही की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की पर पुलिस ने मुठभेड़ में विकास को भी मार गिराया। इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी और जांच आयोग का गठन हुआ है।