बिकरू कांड की जांच कर रही सुप्रीम कोर्ट की समिति ने शहर पुलिस और प्रशासन से कई दस्तावेज मांगे हैं। इसमें अब तक दर्ज हुईं सभी एफआईआर, शहीद पुलिसकर्मियों और एनकाउंटर में मारे गए बदमाशों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही अब तक की कार्रवाई का ब्योरा मांगा हैं।
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बिकरू पहुंची जांच समिति
- फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में शामिल पूर्व जज बीएस चौहान, पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता और हाईकोर्ट के पूर्व जज शशिकांत अग्रवाल मंगलवार को जांच करने कानपुर आए थे। पहले पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरी घटना की जानकारी ली। इसके बाद बिकरू पहुंचकर ग्रामीणों के बयान दर्ज किए थे।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : अमर उजाला
हर एक की भूमिका बतानी होगी
पुलिस और एसटीएफ ने मिलकर अब तक विकास दुबे समेत छह बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया है। 17 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। दस नामजद अभी फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक हर एक बदमाश की घटनाक्रम में क्या भूमिका रही, इसकी जानकारी जांच समिति ने मांगी है। पुलिस विवरण तैयार कर रही है। एक दो दिन में पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी। वहीं पूर्व चौबेपुर एसओ विनय तिवारी व दरोगा केके शर्मा पर दर्ज एफआईआर की कॉपी के साथ उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी मांगी है। सभी संदिग्धों की सीडीआर भी समिति खंगालेगी।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
फोरेंसिक रिपोर्ट और असलहों की जानकारी देनी होगी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच समिति ने फोरेंसिक रिपोर्ट भी मांगी है। खासतौर से दो जुलाई की वारदात और विकास दुबे के एनकाउंटर की फोरेंसिक रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा जांच समिति ने पुलिस से असलहों का विवरण मांगा है। दहशतगर्दों पर कितने केस हैं? उनके पास कौन से असलहे थे? आपराधिक इतिहास होने के बावजूद किसकी लापरवाही व अनदेखी या मिलीभगत से शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए? आदि का विस्तृत विवरण मांगा हैं।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि दो जुलाई की रात को बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था। जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यूपी एसटीएफ ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास दुबे सहित उसके पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। अभी तक पुलिस इस मामले में 15 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। विकास के एक साथी ने सरेंडर भी किया है। वहीं इस घटना में शामिल कई बदमाश अभी तक फरार चल रहे हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए यूपी एसटीएफ की कई टीमें लगी हुई हैं।