फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विकास दुबे के खजांची गैंगस्टर जय बाजपेई के भाई रजय का पुलिस व राजनीति में है रसूख, सामने आया ये सच

Sat, 07 Nov 2020 02:51 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 6
पुलिस हिरासत में जय बाजपेई - फोटो : amar ujala
विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई के तीनों भाइयों पर पुलिस ने गैंगस्टर और कुर्की की कार्रवाई के साथ इनाम भी घोषित किया था लेकिन शहर और प्रदेश पुलिस को धता बताकर लगभग एक माह से फरार चल रहे तीनों भाई कोर्ट में समर्पण करके जेल चले गए। जय की तरह ही उसके भाई रजय का रसूख भी कुछ कम नहीं है।

 
विज्ञापन

2 of 6
जय के तीनों भाइयों ने कोर्ट में किया था समर्पण - फोटो : अमर उजाला
सपा का सक्रिय सदस्य और विधायक का खास होने के नाते सपा शासन में तो उसकी तूती बोलती ही थी, भाजपा शासन में भी उसका जलवा कुछ कम नहीं रहा। आपराधिक मुकदमों के बावजूद रजय को दोनों ही शासन में एसपीओ बनाया गया था। भाजपा शासन में तो वह एस-10 का सदस्य भी रहा।

एएसपी कन्नौज की जांच में पुलिस के सभी सवालों के जवाब रजय ने बड़ी बेबाकी से दिए थे। परिवार में रजय की बात का कितना महत्व है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच में रजय द्वारा दिए गए बयान पर ही जय समेत पांचों भाइयों ने अपनी मुहर लगा दी थी।
 
विज्ञापन

3 of 6
विकास दुबे का खजांची जय - फोटो : अमर उजाला
एएसपी केसी गोस्वामी के सवालों का जवाब देते हुए रजय ने बताया था कि वह सपा में 15-16 साल से नेतागीरी कर रहा है और जय के काम देखता है। बड़े भाई अजय की बैटरी व कार एसेसरीज की दुकान है। छोटा भाई राहुल मकानों व पुरानी गाड़ियों को बिकवाने का काम करता है जबकि शोभित एलएलबी का छात्र है।

जांच के दौरान रजय ने ही परिवार की सभी सम्पत्तियों का ब्योरा भी दिया था। जय पांच भाइयों में तीसरे नंबर का है लेकिन संपत्ति के मामले में वह नंबर वन है। एएसपी ने विस्तृत जांच की संस्तुति भी की थी लेकिन दो साल तक यह रिपोर्ट फाइलों में धूल चाटती रही।

 

4 of 6
जय बाजपेई - फोटो : amar ujala
बिकरू कांड के बाद जब पुलिस जागी तो एक-एक कर परतें खुलने लगीं। रजय ने खुद ही कहा था कि वह जय का कामकाज देखता है इसके बावजूद रजय के नाम पर संपत्ति का न होना, जय के काले कारनामों को पुलिसिया और राजनीतिक संरक्षण देने वाले रजय का नाम कहीं भी सामने न आना, गनर का शौक रखने वाले के नाम खुद शस्त्र लाइसेंस का न होना, फर्जी गनर रखने के मामले से रजय का साफ बच निकलना।

ये कुछ ऐसी बातें रहीं जिस पर पुलिस अफसरों ने कभी गौर ही नहीं किया। सपा के नाम पर राजनीति में और एसपीओ के रूप में पुलिस विभाग में रजय की पैठ मजबूत थी। रजय ने इसका भरपूर फायदा उठाया। बिकरू कांड के बाद भी पुलिस की शुरुआती जांच जय तक ही सीमित रही। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी रजय के कारनामे भी सामने आने लगे। 

 
विज्ञापन

5 of 6
विकास दुबे कांड: जय बाजपेई और पत्नी श्वेता - फोटो : amar ujala
ऐसे जुड़े सपा और विकास से संबंध
सूत्रों की मानें तो वर्ष 2004 में चौबेपुर में ही हुए एक अपहरण के मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए रजय को उठाया था। पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए रजय शहर के तत्कालीन चर्चित सपा विधायक के संपर्क में आया और इसके बाद वह सपा में शामिल हो गया।

संतोष शुक्ला कांड से विकास के बरी होने के बाद और चौबेपुर में अपनी जमीन बेचने के दौरान जय व रजय विकास के संपर्क में आए और फिर राजनीति और अपराध दोनों ही क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए। सूत्र बताते हैं कि रजय ने भी अपनी पत्नी के नाम से संपत्तियां अर्जित की हैं। ब्रह्मनगर, पनकी, चौबेपुर में उसके मकान हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
सपा विधायक के साथ जय और उसके भाई - फोटो : अमर उजाला
सेटिंग के आगे एडीजी के आदेश भी फेल
स्वरूप नगर स्थित बजुका रेस्टोरेंट के मालिक मयंक महेश्वरी ने वर्ष 2018 में रजय व शोभित के साथ आए दर्जन भर लोगों द्वारा खाने के पैसे मांगने पर मारपीट, तोड़फोड़ का मुकदमा स्वरूप नगर थाने में दर्ज कराया था। आरोप था कि दो मूकबधिर कर्मचारियों को इतना पीटा कि दांत टूट गए, सिर फट गए और गंभीर चोटें आईं लेकिन एसओ ने तहरीर फड़वाकर दूसरी तहरीर लिखवाई और हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

जांच अधिकारी भी लगातार समझौते का दबाव बनाते रहे। मयंक ने एडीजी अविनाश चंद्र से शिकायत की लेकिन उनके आदेश को भी तवज्जो नहीं दी गई। दोबारा शिकायत पर एडीजी ने एसएचओ स्वरूप नगर को आदेश का पालन करने और कानूनी कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए लेकिन रजय और थाना पुलिस की सेटिंग के आगे एडीजी के सभी आदेश धरे के धरे रह गए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें