विकास दुबे के मददगारों और उसके असलहों की खरीद-फरोख्त करने वालों के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। एसटीएफ ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों के पास सेमी ऑटोमैटिक राइफल समेत असलहों का पूरा जखीरा बरामद हुआ था। जिन पर चार्जशीट लगी है उसमें भिंड के एक सपा नेता का रिश्तेदार भी शामिल है। पुलिस की विवेचना में आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों से हुई है। मालूम हो कि पनकी पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत सात एफआईआर दर्ज की थीं। इन सभी सातों केसों में चार्जशीट लगाई गई है। एसटीएफ ने दो मार्च 2021 को विष्णु कश्यप, रामजी उर्फ राधे, अमन शुक्ला, अभिनव तिवारी, संजय परिहार, शुभम पाल और मनीष यादव को गिरफ्तार किया था। इनके पास से एक सेमी ऑटोमैटिक राइफल, एक 9 एमएम कारबाइन, एक रिवाल्वर, एक सिंगल बैरल बंदूक, दो देसी तमंचा और करीब डेढ़ सौ कारतूस बरामद हुए थे।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
एसटीएफ ने खुलासा किया था कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद विकास दुबे, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा को इन सभी ने पनाह दी थी। आरोपी मनीष यादव भिंड का रहने वाला है। उसने सेमी ऑटोमैटिक राइफल खरीदी थी। मनीष भिंड निवासी सपा नेता का रिश्तेदार भी है। एसटीएफ ने इसकी एफआईआर पनकी थाने में दर्ज कराई थी।
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विकास दुबे कांड
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एसीपी कल्याणपुर दिनेश कुमार शुक्ला ने बताया कि केस की विवेचना अर्मापुर के इंस्पेक्टर राजेश पाठक ने की। जिन्होंने सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इंस्पेक्टर ने बताया कि विवेचना में पाया गया कि आरोपियों ने विकास व उनके गुर्गों की मदद की फिर असलहों की खरीद-फरोख्त की। इसमें वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए। जल्द केस का ट्रायल कोर्ट में शुरू होगा।
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विकास दुबे कांड: शहीद डीएसपी देवेंद्र मिश्रा, जय बाजपेई
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बिकरू कांड में पुलिस ने माती कोर्ट में 36 आरोपियों के खिलाफ करीब 1700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में विकास दुबे समेत छह बदमाश मारे जा चुके हैं। चार्जशीट के मुताबिक घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। दहशतगर्द विकास को पुलिसकर्मियों ने तहरीर पहुंचने से लेकर दबिश रवाना होने तक की जानकारी दी थी।
इसमें चौबेपुर के पूर्व एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा की मुख्य भूमिका पाई गई। पुलिस ने विवेचना में इन्हीं तथ्यों को शामिल किया है। इससे संबंधित पारिस्थितिजन्य, वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल किया गया है। पुलिस की विवेचना के मुताबिक जब राहुल तिवारी ने विकास दुबे व उसके गुर्गों के खिलाफ पुलिस से शिकायत की थी तभी विकास को सूचना पहुंच गई थी।