बिकरू कांड में दोषी ठहराए गए बजरिया इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव पर शुरूआती कार्रवाई नहीं की गई है। दोषी होने के बावजूद इंस्पेक्टर की थानेदारी बरकरार है। इंस्पेक्टर की जयकांत बाजपेई के साथ मिलीभगत उजागर हुई है। एसआईटी ने अहम भूमिका इंस्पेक्टर की बताई है।
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बिकरू कांड
- फोटो : अमर उजाला
जयकांत बाजपेई का आपराधिक इतिहास होने के बावजूद पासपोर्ट और शस्त्र लाइसेंस बने, इसलिए जांच में बजरिया में रहे पूर्व थानेदार, कई दरोगा एसआईटी जांच के लपेटे में आ गए। वहीं वर्तमान में बजरिया के थानाप्रभारी राममूर्ति यादव की भी जय के साथ सांठगांठ के साक्ष्य मिले हैं।
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विकास दुबे कांड
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सूत्रों के मुताबिक इंस्पेक्टर को जानकारी थी कि फर्जीवाड़ा जय ने किया है, तो इसके लिए उसको कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी। मगर इंस्पेक्टर राममूर्ति ने ऐसा नहीं किया। एसआईटी ने लघु दंड में राममूर्ति यादव पर कार्रवाई की सिफारिश की है। अब विभागीय जांच कर धारा 14 ख के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एसआईटी के आदेश को दो सप्ताह बीत गए हैं लेकिन बजरिया इंस्पेक्टर की थानेदारी अभी भी बरकार है।
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विकास दुबे दरोगा केके शर्मा और विनय तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
साहब का हाथ तो कैसे करें कार्रवाई
बजरिया पुलिस की भूमिका जय को संरक्षण देने में ही पाई गई है। एक दर्जन से अधिक बजरिया व नजीराबाद थाने के पुलिसकर्मी नपे हैं। अधिकतर पुलिसकर्मियों के शहर से तबादले हो चुकेहैं तो कुछ लाइन में हैं। केवल राममूर्ति यादव को ही चार्ज मिला है। करीब एक साल पहले राममूर्ति को चार्ज मिला था। चूंकि जय बाजपेई पूर्व एसएसपी अनंत देव का करीबी था। लिहाजा स्थानीय पुलिस की उस पर मेहरबानी थी। कार्रवाई न करना ये भी एक बड़ा वाजिब कारण था।
दरोगा कुंवर पाल ने भी की थी मुखबिरी
एसआईटी की जांच में विनय तिवारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को वृहद दंड के तहत कार्रवाई की संतुति की है। ये सभी पुलिसकर्मी चौबेपुर थाने के हैं। इसमें दरोगा कुंवर पाल सिंह का भी नाम है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक केके शर्मा व राजीव के अलावा कुंवर पाल की विकास दुबे से बातचीत के साक्ष मिले हैं। उसने भी मुखबिरी की थी।