बिकरू में गुरुवार देर रात विकास दुबे को पकड़ने पहुंची पुलिस पर 100 बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसके जवाब में पुलिस सिर्फ 51 राउंड फायरिंग ही कर सकी। तीन थानों का भारी भरकम फोर्स और पर्याप्त असलाह व कारतूस होने के बाद भी तीन दिशाओं से छतों से हो रही ताबड़तोड़ फायरिंग के चलते किसी पुलिस कर्मी को संभलने तक का मौका नहीं मिल सका।
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कानपुर एनकाउंटर में शहीद पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने 21 नामजद व 80 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र के नेतृत्व में तीन थानों का फोर्स तीन दिशाओं पूर्व, उत्तर व दक्षिण दिशा से विकास दुबे के घर की ओर बढ़ा था तभी तीनों दिशाओं की छतों से बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
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कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद
- फोटो : amar ujala
करीब आधे घंटे में ही पूरा मंजर बदल गया। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद बदमाश 2 नाइन एमएम पिस्टल, 1 एके-47, 1 इंसास रायफल व 70 कारतूस लूट ले गए।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
इनके नाम दर्ज हुई एफआईआर
विकास दुबे, राजाराम उर्फ प्रेमकुमार, श्यामू बाजपेई, छोटू शुक्ला, मोनू जेसीबी चालक, जहान यादव, अतुल दुबे, दयाशंकर अग्निहोत्री, शशिकांत पंडित, शिव तिवारी, विष्णुपाल यादव, रामसिंह, रामू बाजपेई, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा, गोपाल सोनी, हीरा दुबे, बउवन शुक्ला, शिवम दुबे, बाल गोविंद, बउवा दुबे।
मामा व चचेरे भाई की भी थी अपराध में भागीदारी
पुलिस ने विकास दुबे के मामा प्रेमप्रकाश पांडेय व चचेरे भाई अतुल दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया था। भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या के मामले में अतुल दुबे नामजद आरोपी था। 1998 में अतुल ने बंधक बनाए गए युवक को छुड़ाने आए उसके परिजनों पर भी गोली चलाई थी। 2001 में अतुल व प्रेमप्रकाश के खिलाफ शिवली में डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ था।