दो जुलाई की रात हुए बिकरू कांड में विकास दुबे ने साथियों को हवाई फायरिंग नहीं बल्कि पुलिस वालों को सीधे गोली मारने के आदेश दिए थे। इसके लिए उसने अपने शूटरों को बंदूक, राइफल और सेमी आटोमेटिक राइफल भी दी थी। कुछ लोगों को तमंचे भी दिए थे।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
ये बातें मंगलवार को पुलिस रिमांड पर लिए गए उमाशंकर यादव ने बताईं। एसपी ग्रामीण ने बताया कि सुज्जा निवादा गांव निवासी उमाशंकर यादव ने कोर्ट में सरेंडर किया था। इसके बाद कोर्ट से मंगलवार सुबह आठ से शाम चार बजे तक की रिमांड मंजूर हुई।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को चौबेपुर पुलिस उमाशंकर को माती जेल से लेकर आई। सबसे पहले उसे उसके घर लाया गया। घर के पास बालू के ढेर के नीचे से 315 बोर का तमंचा, दो कारतूस और एक खोखा बरामद कराया।
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विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
शाम चार बजे ही मंगा ली थी लाइसेंसी बंदूक
उमाशंकर ने बताया कि दो जुलाई को शाम चार बजे विकास दुबे ने गोपाल सैनी और प्रभात मिश्रा को घर भेजकर उसकी लाइसेंसी बंदूक मंगा ली थी। दोनों उसे भी ले गए थे। वह इलाके में दूध बांट रहा था। पीपों समेत रात आठ बजे वह विकास के घर पहुंचा। यहां कई लोग पहले से मौजूद थे। विकास ने उसे भी तमंचा और बहुत सारे कारतूस पकड़ा दिए।
पुलिस के सामने से निकल गया था उमाशंकर
उमाशंकर ने बताया कि आधा घंटे तक गोलीबारी होने के बाद विकास ने सभी को भागने को कहा। उसने कहा था कि सब लोग संपर्क में रहेंगे और अपने-अपने ठिकानों पर पहुंचेंगे। इसके बाद वह दूध के पीपे और साइकिल लेकर पुलिस के सामने ही निकल गया।