बिकरू कांड में एसआईटी की जांच में दोषी पाए गए 19 प्रशासनिक अफसरों के नाम सार्वजनिक होने के बाद से हड़कंप मच गया है। एक दो अफसरों से बातचीत की तो वो बोले,विकास और जय की फाइलों के साथ राजनीतिक दबाव डाला जाता था। लिहाजा उनको पास करना पड़ता था। मगर आज जब वो फंस गए तो ये अफसर पछता रहे हैं।
फिलहाल अभी कई और बड़े नाम सामने आने वाले हैं। जिन पर शासन सीधे कार्रवाई करने की तैयारी में है। एसआईटी की जांच में पीसीएस अधिकारी दोषी पाए गए हैं। पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और एडीएम सिटी का नाम भी इसमें शामिल है। अधिकारियों के अब पसीने छूटने लगे हैं।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
जांच में दोषी पाए गए एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके कार्यकाल में जब भी विकास दुबे या उसके परिजन या परिचित की फाइल उनके पास पहुंची तो साथ में राजनीतिक दबाव भी डाला गया। कई बार तो विधायक व मंत्री तक के फोन आए।
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विकास दुबे का एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
यही नहीं उच्चाधिकारियों ने भी पैरवी की। लिहाजा उन फाइलों को पास करना पड़ता था। एक अन्य अधिकारी का कहना है कि विकास दुबे या जय की कौन-कौन से फाइल पास की गईं उनको इतना ध्यान भी नहीं है। ये जरूर है कि अचानक अब जब उनका नाम आया तो वो सकते में हैं।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
खुद की करतूत पर डाल रहे पर्दा
दोषी पाए गए अफसर खुद को पाक साफ बता रहे हैं। खासकर जिनसे बातचीत हो सकी। राजनीतिक पार्टियों से जुडे़ लोग जय के पुलिस के अधिकारियों के दबाव बनाने की बात कहकर खुद का पल्ला झाड़ रहे हैं। हालांकि एसआईटी की जांच में ये पता चला है कि इन अफसरों ने विकास दुबे व जय बाजपेई के साथ मिलीभगत कर पूरा खेल किया। खासकर शस्त्र लाइसेंसों, कोटेदारी और जमीन कब्जाने आदि के मामलों में। अभी इसमें कई और परतें खुलना बाकी हैं।
ऐसे दिया था साथ, अब नपे
बिल्हौर तहसील के तहसीलदार और लेखापालों का विकास दुबे से गहरा नाता रहा। जो भी आया वो विकास के दर पर जरूर माथा टेकने जाता था। शस्त्र लाइसेंस में विकास के पक्ष में इन सभी अफसरों ने रिपोर्ट लगाई थी। वहीं जमीनों के मामले में कागजों का हेरफेर किया। ग्रामीणों को परेशान किया और विकास को जमीनें कब्जा कराईं। एसआईटी की जांच में इन तहसीलदारों व लेखपालों की यही मुख्य भूमिका सामने आई है।