शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन में खेल करने में फंसे पुलिसकर्मियों की जांच शुरू हो गई है। सीओ से लेकर सिपाही तक की जांच एसपी ग्रामीण को सौंपी गई है, जबकि तत्कालीन एसपी क्राइम की जांच खुद डीआईजी कर रहे हैं। बिकरू कांड में गठित एसआईटी की सिफारिश पर ये तफ्तीश शुरू हुई है।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
इसमें भी कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान शासन ने निर्देश जारी किया था कि एक-एक शस्त्र लाइसेंस की जांच की जाए। गड़बड़ी होने पर लाइसेंस निरस्त कर धारक पर कार्रवाई की जाए। तत्कालीन एसपी क्राइम राजेश यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
इसमें सीओ आईपीएस बीबीजीटीएस मूर्थी, प्रतिसार निरीक्षक-2 जटाशंकर पाठक, एक सिपाही शामिल था। ट्रेनिंग पर जाने की वजह से आईपीएस की जगह तत्कालीन सीओ अनवरगंज सैफुद्दीन बेग को टीम में शामिल किया गया था।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
एसआईटी की जांच में पता चला कि शहर के 41 हजार 600 लाइसेंसों में केवल 623 लाइसेंसों का ही सत्यापन किया गया था। इसके चलते एसआईटी ने पूरी टीम को दोषी ठहराया है। आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
तत्कालीन एसपी ग्रामीण की जांच आईजी रेंज लखनऊ को
बिकरू कांड में तत्कालीन एसपी ग्रामीण प्रद्युम्न सिंह भी फंसे हैं। विकास दुबे पर नरमी बरतने के साथ ही उनकी बड़ी लापरवाही उजागर हुई थी। आईजी ने बताया कि उनकी जांच आईजी लखनऊ रेंज लक्ष्मी सिंह को सौंपी गई है। वे तत्कालीन डीआईजी कानपुर अनंत देव की भी जांच कर रही हैं।