दहशतगर्द विकास दुबे, उसके साथियों प्रभात मिश्रा और अमर दुबे के मोबाइल फोनों से बड़े खुलासे होने शुरू हो गए हैं। प्रभात और अमर दुबे के मोबाइल से 50 से अधिक कॉल रिकॉर्डिंग वारदात की रात (दो जुलाई) की मिली हैं। इसमें बिकरू कांड की साजिश रचने से लेकर अंजाम देने और फरार होने की एक-एक बात कैद है।
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विकास दुबे: कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
वहीं विकास दुबे का मोबाइल उसके घर में लगे सीसीटीवी कैमरों से अटैच था, लिहाजा उस रात का खूनी खेल भी उसमें कैद होने की आशंका है। एसटीएफ सभी के मोबाइल का डाटा ट्रांसफर कर रही है। विकास के मोबाइल से कुछ डाटा हाथ लगा है। बिकरू गांव स्थित विकास का घर सीसीटीवी कैमरों से लैस था।
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विकास दुबे: कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
मुख्य गेट और आसपास जहां पांच पुलिसकर्मियों को मारा गया था, वहां भी एक कैमरा लगा था। पुलिस को उस दौरान डीबीआर नहीं मिली थी। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक विकास दुबे के आईफोन से सीसीटीवी कैमरे अटैच थे। कुछ डाटा ट्रांसफर हुआ है। एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। केस में ये सभी साक्ष्य भी अहम साबित होने वाले हैं।
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विकास दुबे: कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
प्रभात की भूमिका साजिश रचने और फरारी में अहम
एसटीएफ के मुताबिक विकास ने प्रभात का सबसे अधिक इस्तेमाल किया। फरारी में उसी की पूरी मदद ली थी। सूत्रों के मुताबिक प्रभात के मोबाइल में वारदात संबंधी सबसे अधिक कॉल रिकॉर्डिंग मिली हैं। जब विकास को दबिश की सूचना मिली थी तो उसने प्रभात को फोन कर बुलाया था। उसके बाद प्रभात ने फोन कर कई लोगों को बुलाया। यह भी कहा कि पुलिस को सबक सिखाना है, वो भइया को पकड़ने आ रहे हैं। फरारी के लिए जिन-जिन से संपर्क किया, उनसे भी बातचीत की रिकॉर्डिंग है।
वारदात की फोटो और वीडियो भी मिले
जब विकास दुबे ने गुर्गों को असलहों के साथ एकत्र कर लिया तो प्रभात ने कई फोटो खींचे, वीडियो बनाए। गोलियां चलने के दौरान भी प्रभात ने फोटो खींचे, जिनको निकाला जा रहा है। हालांकि एसटीएफ इस बारे में कुछ भी जानकारी देने से मना कर रही है। क्योंकि ये सभी विवेचना का हिस्सा हैं। इसके अलावा तमाम वीडियो ऐसे मिले हैं, जिसमें विकास दुबे की मौजूदगी में ताबड़तोड़ सैकड़ों राउंड हवाई फायर हुए।