विकास दुबे ने शिवली निवासी कारोबारी वतन अग्निहोत्री को फंसाने की साजिश क्यों रची, इसका भी पर्दाफाश हो गया है। दरअसल प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय व भाजपा नेता संतोष शुक्ला के परिवार से वतन की नजदीकी थी। इन दोनों की हत्या विकास दुबे ने की थी। इस वजह से विकास वतन से भी रंजिश रखने लगा था।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
एक जमीन को बेचने का भी विवाद चल रहा था। 15 जनवरी 2020 को उसने वतन को फोन कर धमकी भी दी थी। ये विकास व वतन की आखिरी बातचीत थी। इन्हीं खुन्नस में उज्जैन से लाए जाने के दौरान विकास दुबे ने एसटीएफ को बताया था कि बिकरू कांड के बाद वह वतन अग्निहोत्री के घर पर दो दिन रुका था।
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विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विकास के असली मददगारों के जेल जाने के बाद वतन ने अमर उजाला को बताया कि वह और उसका परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है। इसलिए विकास से परिचय भी रहा। संतोष शुक्ला और सिद्धेश्वर पांडेय के घर से उनके पारिवारिक संबंध हैं। यही बात विकास को खटकती थी। 15 जनवरी 2020 को सिद्धेश्वर के बेटे की तेरहवीं में गया था। तब विकास ने फोन कर धमकी दी थी कि तुम मेरे विरोधियों के परिवार के खास होते जा रहे हो।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
विकास ने बोले थे कई झूठ
विकास दुबे ने बताया था कि उसने व अन्य आरोपियों ने मोबाइल नदी में और असलह जंगल में छिपाए। मोबाइल और असलह उसके मददगारों के पास से बरामद हुए हैं। उसने बताया था कि शिवली से रसूलाबाद जाते वक्त एक चौकी में उसने रुकने का प्रयास किया था। वह चौकी इंचार्ज को फंसाना चाहता था। वहीं मददगारों के नाम भी गलत बताए।
ईडी की दिल्ली टीम ने शुरू की जांच
बिकरू कांड में चल रही ईडी की जांच अब लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर हो गई है। दिल्ली से टीम भी गठित कर दी गई है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता सौरभ भदौरिया को टीम ने अगले सप्ताह दिल्ली बुलाया है।