उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले में गुरुवार की देर रात करीब 12 घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा अब समाप्त हो गया है। पुलिस मुठभेड़ में आरोपी सुभाष ढेर हो गया, तो वहीं पुलिस के सामने गांव की गुस्साईं महिलाओं ने आरोपी की पत्नी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हालांकि पुलिस ने सभी बच्चों को सुरक्षित बचा लिया। गृह मंत्री अमित शाही ने सीएम योगी आदित्यनाथ को सभी बच्चों को सुरक्षित छुड़वाने के लिए बधाई दी है।
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घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, कथरिया गांव में गुरुवार को सुभाष बाथम की बेटी गौरी (5) का जन्मदिन था। सुभाष ने बेटी के जन्मदिन को धूमधाम से मनाने का निर्णय किया। उसने मोहल्ले के 23 बच्चों को आमंत्रित किया। बच्चों ने जन्मदिन मनाया। फिर इन बच्चों को बाथम ने शाम चार बजे तहखाने में बंद कर दिया।
इसके बाद शराब के नशे में छत पर चढ़ गया। वहां वह चीखने लगा कि अब उसे पुलिस से पकड़वाने का नतीजा भुगतना पड़ेगा। गांव वालों की सूचना पर कोतवाल फोर्स के साथ पहुंचे।
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सिरफिरे ने 11 घंटों से 21 बच्चों को बना रखा बंधक
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उन्होंने सुभाष को बाहर निकलने के लिए कहा तो वह तमंचा ले आया और पुलिस को ललकारते हुए फायरिंग करने लगा। चार-पांच फायर करने के बाद हथगोला फेंका। घटना से गांव में दहशत फैल गई। हथगोले से निकली गिट्टी कोतवाल राकेश कुमार के हाथ में व दीवान जयवीर यादव के पैर में लगी। इस बीच सुभाष कमरे में गया तो मौका देख पुलिस छत पर पहुंच गई और सुभाष को कमरे से निकालने की कोशिशें करने लगी। सूचना पर कई थानों की फोर्स भी आ गई।
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अपहरणकर्ता सुभाष बाथम
- फोटो : अमर उजाला
एसपी डॉ. अनिल मिश्रा, एएसपी त्रिभुवन सिंह, सीओ राजवीर सिंह, स्वाट टीम प्रभारी दिनेश गौतम, जहानगंज एसओ पूनम जादौन व भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह राठौर भी पहुंच गए। विधायक ने आवाज लगाकर सुभाष से कहा कि तुम बच्चों को छोड़ दो, मैं तुम्हारे प्रकरण में बात कर समस्या का निस्तारण कराऊंगा। इस पर सुभाष ने गांव के लल्लू सिंह, बालू दुबे समेत स्वाट टीम के सिपाही सचेंद्र व अनुज तिवारी को बुलाने के बाद ही बच्चों को छोड़ने की बात कही। बालू दुबे ने सुभाष से गेट के पास जाकर बात की और भरोसा दिया कि उसको न्याय मिलेगा। अचानक सुभाष ने गेट के नीचे से बालू दुबे पर फायर कर दिया। उसे सीएचसी में भर्ती कराया गया। सुभाष ने एसपी को बताया कि लालू तिवारी की मुखबिरी पर ही अकारण चार माह पहले स्वाट टीम ने उसको पकड़कर प्रताड़ित किया था।
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अपहरणकर्ता सुभाष बाथम (दाएं) और घायल बालू देव (बाएं)
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इसके बाद देर रात पुलिस ने सुभाष के दोस्तों को बुलवाया और दरवाजा खुलवाने का प्रयास कराया। चार दोस्त दरवाजे के पास गए और बैठकर सुभाष को आवाज दी। दोस्त की आवाज सुनकर सुभाष गेट के पास आया और दोस्तों से बात करने लगे। वह अपनी गांव की रंजिश और समस्याओं को बताने लगा। तभी एक दोस्त ने शराब पीने के लिए गेट खोलने को कहा तो सुभाष ने गेट के नीचे खाली जगह से पौव्वा देने की बात कही।
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बंधक बनाए गए सभी 23 बच्चों को पुलिस ने 11 घंटे बाद छुड़ाया
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दोस्त ने आधा पौव्वा शराब दी, जिसको सुभाष ने पीकर बाहर खाली शीशी उसी खाली जगह से बाहर निकाल दी। तभी सुभाष की पत्नी भी उसके दोस्तों से बात करने लगी। दोस्तों ने कई बार सुभाष को दरवाजा खोलने के लिए उकसाया, लेकिन उसने गेट नहीं खोला। पुलिस भी गेट से कुछ दूर हट गई और छत पर डेरा जमा लिया। फिर भी सुभाष ने गेट नहीं खोला। देर रात तक दोस्त सुभाष को गेट खोलने के लिए मनाने का प्रयास करते रहे। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह भी सुभाष को समझाने का प्रयास करते रहे।
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सुरक्षित आए बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद जब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटने लगा तो उन्होंने देर रात घर में पथराव भी किया। पुलिस ने बातचीत में सुभाष को उलझाया और एक टीम ने पीछे से अपहरणकर्ता सुभाष के घर का गेट तोड़ना शुरू किया। जिसके बाद 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल निकाल लिया। और पुलिस मुठभेड़ में आरोपी को मार गिराया गया। इस दौरान आरोपी सुभाष की पत्नी रूबी गांव पर गांव की महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। महिलाओं ने रूबी को जमकर पीटा। किसी तरह से पुलिस ने रूबी को महिलाओं से छुड़ाया और गंभीर हालत में अस्पताल भेजा। इलाज के दौरान रूबी ने दम तोड़ दिया। वहीं सीएम ने पुलिस टीम को 10 लाख का ईनाम देने का एलान किया।
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सुरक्षित बचाए बच्चे
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आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि बच्चों को बचाने के लिए पुलिस आरोपी के घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी। इसी दौरान आरोपी ने बचने के लिए पुलिस पर फायर किया जिसके बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी को मार गिराया गया। बंधन मुक्त होकर जब बच्चों को सुभाष के घर से पुलिस कर्मियों ने निकाला तो उन्हें देख उनके परिजनों की जान में जान आई। सभी ने अपने-अपने कलेजे के टुकड़ों को गले से लगा लिया। तो कई बच्चों के माताओं की खुशी से आंखें भी नम हो गईं।
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सुरक्षित बचाए बच्चे
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पुलिस कार्रवाई में सुभाष की मौत होने के बाद डाक्टरों की टीम ने सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान किसी को सुभाष के घर के अंदर नहीं जाने दिया। सभी अपने बच्चों को सकुशल देखने को परेशान थे। जब सभी बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण हो गया और सभी स्वस्थ्य थे तब बच्चों को पुलिस कर्मियों ने बाहर निकालकर एक-एक कर उनके माता पिता को सौंपा तो परिजनों ने अपने लाडले को सीने लगा लिया और माथे को चूमकर पूछा बेटा सुभाष ने पीटा तो नहीं था।
सीएम योगी एवं गृह मंत्री अमित शाह
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बच्चे ने अपनी डर भरी दास्तां माता-पिता को बताई। सभी बच्चों के माता-पिता व अन्य परिजन अपने कलेजे के टुकड़ों को देख कर ऊपर वाले और पुलिस का धन्यवाद करते नजर आए। कहा कि पुलिस ने सही समय पर उचित फैसला लिया। तभी उसके बच्चे सकुशल मिल सके।