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यूपी की इस नदी पर अब योगी और शिवराज होंगे आमने-सामने, जानिए क्या है मामला

Sun, 26 Mar 2017 11:54 PM IST
रशीद सिद्दीकी, अमर उजाला, बांदा

सार

-यूपी की केन नदी से एमपी के पट्टे पर हो रहा खनन
-सीमावर्ती खदानों में बालू माफियाओं का खेल 
-मध्यप्रदेश में भी है भाजपा सरकार
- यूपी में रोक है, एमपी में चल रहीं हैं खदानें
- रोजाना लाखाें की रायल्टी को लगा रहा चूना
 
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बांदा की सरहद से जुडे़ मध्य प्रदेश की चंदौरा खदान में केन नदी से बालू ढोते ट्रक।
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विस्तार
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अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भले ही सख्त रवैया दिखा रहे हाें पर इस हाईप्रोफाइल गोरखधंधे में उनकी पार्टी का भी दामन साफ नहीं है। सीमावर्ती मध्य प्रदेश में उनकी ही पार्टी की सरकार के मुखिया शिवराज सिंह खनन माफियाओं पर मेहरबान हैं। नतीजे में वहां धड़ल्ले से हो रहे खनन की आड़ में बांदा (यूपी) की खदानों में भी अवैध खनन का खेल चल रहा है। ऐसे में दोनों सीएम इस मुद्दे पर आमने-सामने हो सकते हैं। 
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  यूपी के नए सीएम ने अवैध खनन पर सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में खबरदार कर दिया है कि अवैध खनन हुआ तो डीएम और एसपी सीधे जिम्मेदार होंगे। इस सख्त चेतावनी के बाद अधिकारियों में कुछ खौफ पैदा हुआ है। डीएम और एसपी तक अवैध खनन की चेकिंग को निकलने लगे हैं। लेकिन बुंदेलखंड की सरहद से जुड़े मध्य प्रदेश में खनन पर कोई रोक नहीं है। वहां भाजपा की सरकार ने खदानों के पट्टे दे रखे हैं। 

बांदा जिले की सरहद से जुडे़ एमपी के पन्ना जनपद के अजयगढ़ थाना अंतर्गत चंदौरा गांव के पास केन नदी में पिछले वर्ष से रात-दिन जबरदस्त बालू का खनन हो रहा है। लगभग 1000 ट्रक यहां से प्रतिदिन बालू लेकर यूपी-एमपी के विभिन्न शहरों में रवाना हो रहे हैं। चंदौरा घाट में नदी के इस पार बांदा जनपद की सीमा है।
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इसमें भी काफी बालू है। चंदौरा घाट के नाम पर बांदा की खदानों से भी बालू निकाली जा रही है। बालू के ट्रक गिरवां थाना क्षेत्र से बांदा जनपद में प्रवेश करके अपने गंतव्य को रवाना हो रहे हैं। ऐसे में अवैध खनन को पूरी तरह रोक पाना टेढ़ी खीर बन गया है। मध्य प्रदेश सरकार की रोक के बिना अवैध खनन रूकना नामुमकिन है। 


 

खनन पर कोर्ट ने लगाई है रोक 

डेमो
उत्तर प्रदेश समेत पूरे बुंदेलखंड में पिछले वर्ष से बालू खनन पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। बुंदेलखंड में 1300 से ज्यादा खदानें हैं। इन्हें हर वर्ष प्रदेश का खनिज विभाग पट्टे पर उठाता है। इससे प्रदेश सरकार को करीब 510 करोड़ का सालाना राजस्व मिलता है। लेकिन अवैध खनन और पट्टों की अवधि के विवाद को लेकर पिछले वर्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी खदानों पर रोक लगा दी है। तब से खनन बंद है। पुलिस, खनिज विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से कुछ खदानों में चोरी-छिपे अवैध खनन हो रहा है।

बुंदेलखंड में बालू खदानों और पट्टों की स्थिति

जनपद     खदान     पट्टे         रिक्त क्षेत्र
बांदा         190         86         104
चित्रकूट     141     118            23
हमीरपुर     83         79            04
महोबा       330      327           03
जालौन        89         38           51
ललितपुर   129        98           31
झांसी         349      279          70
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योग         1311     1025       286
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नोट- उपरोक्त आंकडे़ समाजसेवी आशीष सागर द्वारा आरटीआई के तहत जुटाए गए हैं।

 

पूर्व सरकार ने दिए तमगे, सीबीआई ने डाला ‘फंदा’   

डेमो
बुंदेलखंड में बालू के अवैध खनन को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर भले ही सीबीआई जांच तक की नौबत आ गई है, लेकिन पिछली सपा सरकार ने खनन वाले जनपदों के खनिज अधिकारियों को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। अब यह लगभग सभी अधिकारी जांच के घेरे में हैं। महोबा के पूर्व खनिज अधिकारी भागवत प्रसाद यादव को पूर्व सरकार ने गोल्ड मेडल से नवाजा था। साथ ही, महोबा के सर्वेयर अशोक मौर्य व मनोज यादव को प्रशस्ति पत्र दिए थे। हमीरपुर के तत्कालीन खनिज अधिकारी (भू वैज्ञानिक) मुईनुद्दीन को सिल्वर मेडल और विजय भूषण तिवारी को प्रशस्ति पत्र मिला था। बांदा जनपद के तत्कालीन खनिज अधिकारी/सहायक रसायनज्ञ हवलदार सिंह यादव और चित्रकूट के खनिज अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था। 
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बालू के बलबूते बन गए ‘माननीय’

डेमो
बुंदेलखंड के कई बालू कारोबारी ‘माननीय’ के मुकाम तक पहुंच गए हैं। पिछले वर्ष विधान परिषद (स्थानीय निकाय) के हुए चुनाव में हमीरपुर के सपा नेता चुनाव लडे़ और निर्विरोध चुनकर एमएलसी बन गए। यह बडे़ खनन के कारोबारी रहे हैं। इसी तरह बांदा जनपद में बालू के पुराने पट्टाधारक और कारोबारी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बन गए हैं। तिंदवारी के पूर्व कांग्रेस विधायक दलजीत सिंह भी बालू कारोबारी रह चुके हैं।  
  
 
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