भतीजी को न्याय दिलाने में पहले भाई फिर मां और अब पत्नी व साली को खोने वाले दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के चेहरे पर गम के साथ विधायक के प्रति गुस्सा साफ दिखा। अंतिम संस्कार के बाद जेल जाते वक्त उसने वाहन के अंदर से चीखकर कहा, विधायक कुलदीप सिंह सेंगर मेरे परिवार को खा गया...। अब हम ही रह गए हैं...। मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, उसके पूरे साक्ष्य हैं।
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किशोरी के चाचा ने चीख चीख कर लगाए कुलदीप सेंगर पर अरोप
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को रायबरेली में हुई घटना में पत्नी की मौत के बाद बुधवार को शव के अंतिम संस्कार में दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने अंत्येष्टि स्थल पर करीब पांच घंटे बिताए। चिता पर पत्नी का शव देख उसकी आंखें नम हो गईं। मासूम बेटे के चेहरे पर नजर गई तो वह एक पल के लिए भावुक हुआ लेकिन परिवार का दर्द को देख कलेजे पर पत्थर रख लिया। चिता ठंडी होने तक वह परिजनों को धैर्य बंधाता रहा।
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दुष्कर्म पीड़िता का चाचा परिजनों से मिलकर फफक कर रो पड़ा
- फोटो : अमर उजाला
उसने कहा कि भतीजी को न्याय दिलाने में जान भी चली जाए तब भी वह अब पीछे मुड़कर नहीं देखेगा। उसने अपने मासूम बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए उसे सीने से लगाया और जेल जाने के लिए पुलिस के साथ वज्रवाहन में बैठने के लिए चल पड़ा। मीडिया उससे मुखातिब न हो सके, इसके लिए शुरुआत में लगाया गया पहरा और मजबूत कर दिया गया।
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पत्नी को मुखाग्नि देता उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता का चाचा
- फोटो : अमर उजाला
चलते वाहन की जाली के पास आकर उसने चिल्ला कर कहा कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके पूरे परिवार को मरवा दिया। अब तक उसके ऊपर जितने मुकदमे दर्ज हैं वह विधायक के इशारे पर गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं। उसके पास सारे साक्ष्य भी मौजूद हैं। अब उच्च न्यायालय उसे इंसाफ देगा।
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अधिकारियों से बात करता पीड़िता का वकील
- फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार को शव लेकर पहुंचे अन्य लोगों को लौटाया
शुक्लागंज के पक्का घाट पर अंतिम संस्कार करने के लिए शव लेकर गए अन्य लोगों को पुलिस ने घाट जाने वाले रास्ते से ही लौटा दिया। इस पर लोगों ने बालू घाट पर शवों का अंतिम संस्कार किया। पुलिस की सुरक्षा का आलम यह था कि पक्का घाट से एक किमी की दूरी में हर दस कदम पर पुलिस तैनात रही।
अंत्येष्टि स्थल के आसपास गोताखोर भी रहे मुस्तैद
सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल के साथ डीएम और एसपी ने अंत्येष्टि स्थल के आसपास कई कुशल गोताखोरों को लगाया था। इन गोताखोरों को एक-एक पहचान पत्र भी दिया गया था। गोताखोर अंतिम संस्कार पूरा होने और सभी लोगों के वहां से हटने तक घाट के दोनों तरफ डटे रहे।