उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के चाचा ने न्याय की लड़ाई में मोबाइल को हथियार बनाया था। चाचा व उसके परिजनों को विधायक द्वारा फोन पर कई बार धमकी दी गई थी। विधायक के करीबी भी पीड़ित परिवार को मुकदमे में सुलह के लिए धमकाते रहे। हालांकि पीड़ित परिवार ने फोन पर मिल रही धमकियों से बिना डरे उन्हें न्याय पाने के लिए साक्ष्य बना लिया।
प्रत्येक कॉल को रिकार्ड कर चाचा ने उन्हें साक्ष्य के तौर पर सीबीआई को सौंपा। पीड़िता के चाचा ने न्याय व परिवार की सुरक्षा के लिए पीएमओ को मोबाइल से सौ से अधिक बार ट्वीट भी किया था।
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उन्नाव: विधायक सेंगर प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2017 में दिल्ली में रहकर कारोबार करने वाले चाचा ने दिल्ली से ही लखनऊ के उच्चाधिकारियों के अलावा उन्नाव के सीओ, एसपी के पीआरओ, माखी थाने के एसओ, हल्का इंचार्ज के साथ ही विधायक, उनके भाई, मारपीट व एफआईआर दर्ज कराने वाले विधायक के गुर्गों तक से बार-बार बात की थी।
इन फोन कॉलों ने घटना की वजह, दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज न होने के पीछे विधायक के दबाव, तहरीर में मन मुताबिक बदलाव के पीछे की वजहों की कलई खोली थी। किशोरी के चाचा ने फोन कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया के माध्यम से मीडिया तक पहुंचाई थी।
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3 अप्रैल 2018 को किशोरी के पिता की साथ की गई मारपीट और उसी को तमंचा रखने व मारपीट करने के अरोप में जेल भेजने के साथ न्यायिक हिरासत में मौत होने की सूचना को भी सोशल मीडिया के जरिए मीडिया तक पहुंचाया गया था।
अप्रैल 2018 में चाचा ने 100 से अधिक कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर शेयर करने के साथ ही सीबीआई को भी सौंपी थीं। उसने मोबाइल के अलावा एक सीडी और पेन ड्राइव भी सीबीआई को दी थी।
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चार माह में किए थे 107 ट्वीट
विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी के चाचा ने न्याय के लिए जनवरी 2017 से 4 अप्रैल 2017 के बीच पीएमओ, प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित सूबे के अन्य आला अधिकारियों को कुल 107 ट्वीट किए थे। हर ट्वीट में उसने भतीजी के लिए न्याय की गुहार लगाई। हालांकि सरकार ने तब इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया था।
प्रार्थनापत्रों की 512 फोटो कॉपी भी सीबीआई को दी थीं
विधायक और उनके गुर्गों के खिलाफ किशोरी के चाचा ने शिकायतों और फर्जी जांच रिपोर्टों का जखीरा सीबीआई को सौंपा था। किशोरी के चाचा ने एक साल में की गई 65 अलग-अलग शिकायतें की थीं। सभी शिकायतों और मिले जवाब की फोटो कॉपी के 512 पेज तैयार कर सीबीआई को दिए थे। इसके अलावा ऑडियो क्लिप की 24 सीडी भी सीबीआई को दी थीं। जिनकी जांच चल रही है।
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पीड़ित परिवार पर मानहानि के पांच मुकदमे
पीड़ित किशोरी की 21 जून 2017 को बरामदगी के बाद विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ सोशल मीडिया पर कई तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थीं और पर्चे बांटे गए थे। अक्टूबर 2017 को विधायक के एक समर्थक ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। अगले ही महीने नवंबर 2017 को एक समर्थक ने आईटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखवाया। विधायक पक्ष ने पीड़िता के पिता पर मानहानि का एक और चाचा व चाची के खिलाफ मानहानि के चार मुकदमे दर्ज करा रखे हैं। जिनकी सुनवाई चल रही है।
12 दिनों में चाचा पर चार एफआईआर
विधायक के खिलाफ आवाज उठाने पर दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार पर दबाव बनाने के लिए मुकदमों की झड़ी लगा दी गई थी। पुलिस ने पीड़िता के चाचा के खिलाफ कुचक्र रचने में विधायक का साथ दिया था। पीड़िता के चाचा पर 12 दिनों के अंतराल में 4 रिपोर्ट दर्ज कराई गईं थीं। उनमें 3 की दिनांक दिन एक ही दर्शाया गया। जिन लोगों ने रिपोर्ट दर्ज कराई उनका जुड़ाव भी विधायक से है।
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एक थे दोनों परिवार, किशोरी से दुष्कर्म के बाद शुरू हुई दुश्मनी
अप्रैल 2018 में किशोरी के पिता की न्यायिक अभिरक्षा में मौत के बाद तीन भाइयों में किशोरी का चाचा ही अकेला बचा है। मौजूदा समय में वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। परिवार का कहना है कि अगर विधायक उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म न करते तो परिवार की चाकरी दुश्मनी में न बदलती।
पीड़ित किशोरी के ताऊ शुरुआत से ही कुलदीप की सुरक्षा से लेकर उनका हर काम करते थे। इसी वजह से विधायक पूरे परिवार से जुड़े थे। दोनों परिवारों में आपसी मनमुटाव तब शुरू हुआ जब 1990 के पंचायत चुनाव में किशोरी के ताऊ (अब मृतक) ने बीडीसी का चुनाव लड़ा था।
परिजनों के अनुसार कुलदीप ने यह कहकर चुनाव लड़ने से रोका कि गांव में एक ही नेता रहेगा। विरोध के बाद भी किशोरी के ताऊ ने चुनाव जीत लिया। इसके बाद विधायक से मनमुटाव हो गया। इसके बाद भी पीड़िता के चाचा (वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद) ने कुलदीप का साथ दिया। वर्ष 2010 में ताऊ की शहर के मोहल्ला कलक्टरगंज में गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इसके बाद किशोरी के चाचा ने कुलदीप से दूरी बना ली और दिल्ली में रहने लगा। वह अपना कारोबार करने लगा। भतीजी से दुष्कर्म और इसके बाद भाई की (पीड़िता के पिता) की बेरहमी से पीटकर हत्या की घटना ने दुश्मनी की गहरी खाई खोद दी। पीड़िता और उसके परिवार ने कानून का सहारा लिया और अपने लिए न्याय की लड़ाई शुरू की।