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20 माह में अर्श से फर्श पर पहुंचे कुलदीप, 25 साल में खड़ा किया था अपना साम्राज्य, पढ़ें राजनीतिक सफर

Tue, 17 Dec 2019 01:15 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
उन्नाव में किशोरी से दुष्कर्म करने वाले विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत की राजनीति से शुरू हुआ था। वह एक बार गांव का प्रधान भी चुना गया। इसके बाद उसने युवा कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।



सभी दलों में अच्छी पैठ के बूते वह लगातार चौथी बार विधायक चुना गया। राजनीतिक रसूख ही है कि दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने, जेल जाने और सीबीआई की जांच जारी होने के बाद भी भाजपा ने उसे पार्टी से नहीं निकाला। हालांकि रायबरेली हादसे के बाद विपक्षी दलों ने सवाल उठाए तो जुलाई 2019 को उसे पार्टी से निकाले जाने की घोषणा की गई।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
कुलदीप सिंह के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के हाथगाम थाना के मुक्तीपुर गांव के रहने वाले थे। नाना वीरेंद्र सिंह के कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी (विधायक की मां) और सरोजनी देवी हैं। चुन्नी देवी शादी के बाद से अपने परिवार के साथ पिता के संग रहने लगीं।

चार भाइयों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज (अब मृतक) दूसरे नंबर का और अतुल तीसरे नंबर का है। सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की दस साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। सभी का जन्म भी यहीं इसी गांव में हुआ। कुलदीप 1996 में ग्राम प्रधान चुने गए। इसके बाद दो पंचवर्षीय में मां चुन्नी देवी प्रधान बनीं। वर्तमान में छोटे भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ग्राम प्रधान हैं।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए। 2007 में उन्होंने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने। 2012 में फिर सपा के टिकट पर भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए। 2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत करके जिला पंचायत चुनाव में अपनी पत्नी संगीता सेंगर को उतार दिया।

सपा में रहते हुए उन्होंने पार्टी के घोषित प्रत्याशी के खिलाफ पत्नी को चुनाव जितवाया। विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में भाजपा का दामन थाम लिया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ से प्रत्याशी बनाया और वह लगातार चौथी बार विधायक बने। पत्नी संगीता सेंगर लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं। और पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। इससे पहले छोटे भाई मनोज सिंह 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लाक के प्रमुख रहे। 26 अक्तूबर 2019 को मनोज सिंह की दिल्ली में मौत हो गई।

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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
दूसरी बार पुलिस की केस डायरी में आया नाम
बाहुबली चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मुकदमे को छोड़ दिया जाए तो 10 अप्रैल 2018 को पहली बार किशोरी से दुष्कर्म, उसके पिता की हत्या में कुलदीप का नाम आया। इसके बाद 28 जुलाई को रायबरेली में पीड़िता के कार एक्सीडेंट का दूसरा आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ। हालांकि शहर व जिले की कई आपराधिक घटनाओं में उनकी मिलीभगत सामने आई, लेकिन उसके रसूख के आगे कोई रिपोर्ट दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
डिग्री विवाद से भी चर्चा में आए थे कुलदीप
कुल 23 साल के लंबे सियासी सफर में कुलदीप ने पहला चुनाव उन्नाव की सदर सीट से बसपा के टिकट पर लड़ा और जीता था। इस चुनाव में दाखिल हलफनामे में कुलदीप ने खुद को ग्रेजुएट ही घोषित किया था। वर्ष 2007 और वर्ष 2012 के चुनाव नामाकंन में उन्होंने शैक्षिक योग्यता ग्रेजुएट ही बताई गई। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बतौर भाजपा प्रत्याशी कुलदीप ने बांगरमऊ से परचा दाखिल करते समय खुद को इंटरमीडिएट पास मार्कशीट लगाई। विरोधियों ने नामाकंन पर्चा रद्द करने की मांग उठाई तो उन्होंने माता जी का निधन होने से शैक्षिक प्रमाणपत्र खो जाने की बात कहकर अपना बचाव किया था।
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उन्नाव कुलदीप सेंगर प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
उम्र की रफ्तार रही सुस्त, बढ़ती गई जायदाद
कुलदीप की उम्र भी सस्पेंस में है। वर्ष 2002 के हलफनामे में कुलदीप ने खुद को 40 साल का बताया, जबकि वर्ष 2007 में उम्र 43 वर्ष बताई। इसी प्रकार वर्ष 2012 के चुनाव में कुलदीप की उम्र 48 वर्ष थी, जोकि वर्ष 2017 यानी पिछले विधानसभा चुनावों में सिर्फ 50 वर्ष पहुंची। दूसरी ओर, कुलदीप की संपत्ति दिन दोगुनी और चार चौगुनी की रफ्तार से बढ़ती गई। वर्ष 2007 में कुलदीप सेंगर के पास सिर्फ 36 लाख रुपए की जायदाद थी, जोकि वर्ष 2012 में सवा करोड़ से ज्यादा हो गई, जबकि अगले पांच साल में वर्ष 2017 तक तीन करोड़ का आंकड़ा पार कर गई।
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