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शहादत को मुंह चिढ़ा रहे कोरे वादे, 13 साल बीत गए कागजों तक सीमित हैं दावे

Sun, 03 Mar 2019 02:35 PM IST
प्रशांत कुमार अनुराग मिश्रा, अमर उजाला, कानपुर
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शहीद के नाम का बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
देश की सेवा करते शहीद हुए उन्नाव जिले के कई शहीदों के परिजन अब प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। शहीदों के सम्मान में प्रतिमाएं लगवाए जाने के वादे उनकी शहादत को मुंह चिढ़ा रहे हैं। जांबाजों की प्रतिमाएं न लग पाने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। उधर, पंपोर हमले में शहीद हुए गंजमुरादाबाद के लाल का स्मारक स्थल तो बना लेकिन समस्याएं दूर नहीं हो सकीं। 
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शहीद शिवाकांत सिंह की प्रतिमा के लिए बना स्थल - फोटो : अमर उजाला
आतंकियों व पाकिस्तानी फौज से डटकर मुकाबला कर देश रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले जिले के जांबाज मौजूदा समय में अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। बता दें कि हिलौली ब्लॉक की ग्रामसभा धनोखर के मजरे मवई निवासी शिवाकांत सिंह चौहान 15 जुलाई 2006 को देश की रक्षा में आतंकियों से मोर्चा संभालते हुए शहीद हो गए थे।
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डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला
इस दौरान तत्कालीन सत्ता पक्ष के नेता व अधिकारियों ने शहीद के पैतृक गांव में कारगिल शहीद स्मारक स्थल के लिए स्थान चिह्नित किया था। काफी दिनों तक स्मारक स्थल का निर्माण आश्वासन की जुबानी पर होता रहा। काफी लंबे इंतजार के बाद शहीद की पत्नी निर्मला का सब्र टूटा और निजी पैसे से मंदिर आकार का स्थल बनवाया। शहादत के 13 साल बीत गए लेकिन प्रशासनिक दावा अभी कागजों तक सीमित हैं। शहीद के दोनों बेटे सूर्यप्रताप सिंह चौहान फिरोजपुर पंजाब में व अवकाश सिंह चौहान जम्मू कश्मीर में थलसेना में रहकर देश की रक्षा में डटे हैं। 


 

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डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला
तहसील बीघापुर के गांव महराजपुर निवासी रामकिशोर शुक्ला वर्ष 2000 में जम्मू कश्मीर में शहीद हुए थे। उस समय प्रशासन ने स्मारक बनवाने का वादा किया था। जो अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। शहीद की पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि स्मारक बनवाना दूर करीब एक साल से पेंशन भी नहीं मिल रही है। दर्द बताकर वह भावुक हो उठीं और अधिकारियों के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया। वहीं शहीद का बेटा आशीष शुक्ला जम्मू कश्मीर में बार्डर पर तैनात होकर राष्ट्ररक्षा का धर्म निभा रहा है। 

 
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डेमो पिक - फोटो : अमर उजाला
गंजमुरादाबाद के गांव सुल्तानपुर निवासी अमर शहीद कैलाश यादव 25 जून 2016 को जम्मू कश्मीर के पंपोर में आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए थे। जांबाज की शहादत को युवाओं के बीच आदर्श बनाने के लिए स्मारक स्थल, पार्क व गांव में शहीद के नाम पर सड़कें बनाने के वादे खूब हुए लेकिन दिन बीतने के साथ ही वादे गुमनाम होते गए। स्मारक के ऊपर से निकली जर्जर एचटी विद्युत लाइन कई बार मांग करने के बावजूद भी हटाई नहीं जा सकी है। इसके अलावा गांव के विकास की बातें खूब हुईं लेकिन हकीकत में हुआ कुछ भी नहीं।
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