एसआईटी (विशेष जांच टीम)की रिपोर्ट पर शासन के निर्देश मिलने के बाद बुधवार रात माखी थाना पुलिस ने पीड़िता की मां की तहरीर पर विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनका सहयोग करने वाली महिला शशि सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मुकदमे में पाक्सो एक्ट के अलावा दुष्कर्म, दुष्चरित्र करने, अपहरण की धाराएं शामिल हैं। वहीं पीड़िता ने विधायक की गिरफ्तारी न होने से शासन-प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
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कुलदीप सिंह सेंगर
विधायक पर दर्ज मुकदमे में दो धाराएं गैर जमानती
- पाक्सो एक्ट-(लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012) की
विशेषता
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कुलदीप सिंह सेंगर
- गैर जमानती अपराध, किसी भी न्यायालय से बिना सुनवाई तत्काल जमानत नहीं।
-विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट या त्वरित न्यायालय द्वारा विचारणीय।
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कुलदीप सिंह सेंगर
-यदि पीड़िता चाहे तो उसे न्यायालय में पर्दे के पीछे रखकर बयान दर्ज करने का अधिकार।
-अभियुक्त बलशाली है तो पीड़िता का अभियुक्त से सामना नहीं कराया जाएगा।
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कुलदीप सिंह सेंगर
-अगर पीड़ित चाहता है तो एकांत में सुनवाई और बयान लिए जा सकते हैं।
-मुलजिम की शिनाख्त के लिए पीड़ित से आमने-सामने पहचान करना आवश्यक नहीं।
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कुलदीप सिंह सेंगर
-इस अधिनियम के तहत अभियुक्त को कम से कम 7 वर्ष कारावास और अधिकतम उम्रकैद की सजा।
- धारा 506 आईपीसी: अभियुक्त द्वारा जान से मारने या चोट पहुंचाने की धमकी देने पर लगाई जाती है। अधिकतम 7 वर्ष कारावास या जुर्माना।
-धारा 376 आईपीसी: कठोर कारावास व जुर्माना, सजा कम से कम सात वर्ष की सजा या उम्रकैद।
-धारा 366 आईपीसी: किसी स्त्री को विवाह करने को विवश करना या दुष्चरित्र करना।
धारा 363 आईपीसी: व्यवहरण (अपहरण) सात वर्ष कारावास और जुर्माना का प्रावधान।