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दो मशहूर कवियों के निधन से साहित्य जगत स्तब्ध, दोनों ने आखिरी मंच से ली थी यह अंतिम सेल्फी

Tue, 13 Mar 2018 01:35 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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प्रमोद तिवारी एवं कवि केडी शर्मा की अंतिम सेल्फी
सोमवार तड़के रायबरेली के लालगंज में कवि प्रमोद तिवारी और केडी शर्मा ‘हाहाकारी’ ने आखिरी मंच साझा किया था। यह सेल्फी केडी शर्मा ने फेसबुक पर पोस्ट की थी। इस आयोजन के बाद घर लौटते समय हुए हादसे में दोनों अनंत की यात्रा पर चले गए।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक सड़क दुर्घटना में कवि प्रमोद तिवारी तथा अवध क्षेत्र के हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी का दुखद निधन हो गया। हादसा लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचलगंज थाना क्षेत्र के बदरका चौराहे पर सोमवार तड़के हुआ। ट्रक और कार की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। दोनों कवि कार के जरिए रायबरेली के लालगंज से कवि सम्मेलन में भाग लेकर वापस आ रहे थे।दोनों कवियों की मौत की खबर से साहित्य जगत में सन्नाटा पसर गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। जाने माने कवि कुमार विश्वास ने ट्विटर पर दोनों कवियों के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
 
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आकस्मिक निधन से दोनों के प्रशंसक हुए मायूस, साहित्य जगत स्तब्ध

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प्रमोद तिवारी
कवि प्रमोद तिवारी और केडी शर्मा ‘हाहाकारी’ के आकस्मिक निधन से कानपुर का साहित्य जगत स्तब्ध है। दोनों के ही प्रशंसकों की शहर में बहुत बड़ी संख्या है। प्रमोद तिवारी के बचपन से लेकर कवि बनने तक के सफर को याद कर रहे हैं उनके बाल सखा कवि कमलेश द्विवेदी। उनके पत्रकारीय जीवन का स्मरण कर रहे हैं कभी उनके सहकर्मी रहे अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तनवीर हैदर उस्मानी और केडी शर्मा ‘हाहाकारी’ की स्मृतियों को शब्दों में उतारा है, उनके साथ तमाम मंच साझा करने वाले कवि मुकेश श्रीवास्तव ने।   

कवियों का परिचयः 
प्रमोद तिवारी

जन्म : 31 जनवरी 1960
निधन: 12 मार्च 2018
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केडी शर्मा ‘हाहाकारी’
जन्म : 15 नवंबर 1949
निधन: 12 मार्च 2018
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अन्नू अवस्थी के ऑडियो में झलका गम

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अन्नू अवस्थी ने व्यक्त किया दर्द
कानपुर के मशहूर कॉमेडियन अन्नू अवस्थी ने अपना ऑडियो रिलीज कर इस अंदाज में दोनों कवियों को याद किया। --  कानपुर से अन्नू अवस्थी बोल रहे हैं। आज हमारे बीच दो कवि नहीं रहे। केडी शर्मा हाहाकारी जी, जिनको हम मामा बोलते थे और प्रमोद तिवारी जी, जिनको हम दादा बोलते थे। हाहाकारी जी ने हमको एक रचना लिखकर दी थी और कहा था कि अन्नू जब किसी बड़े स्टेज पर जाना तो ये सुनाना, हम सामने बैठकर ताली बजइबे, तुम हमेशा हमरे लिए ताली बजाए हो। अब मामा जी आप नहीं रहे, कहीं न कहीं आपकी आत्मा सुनेगी, स्टेज से तो हम सुना नहीं पाए। इसका गम हमको जिंदगी भर रहेगा ।
 

ऑडियो में ‘हाहाकारी’ कविता 

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केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी फोटो
झंडा बेचो, डंडा बेचो, सड़क किनारे अंडा बेचो
मोती बेचो, चोटी बेचो, बाला-झाला लंगोटी बेचो
बंगलादेसी कोट कमीजें बेचो, बोरी-दरी गलीचे बेचो
सब्जी-फल-छुआरा बेचो, पांच रुपइया में दुई गुब्बारा बेचो
भुट्टा चना मकाई बेचो, चूहा मार दवाई बेचो
हीरो हीरोइन की तस्वीरें बेचो, सोने की नकली जंजीरें बेचो
चाभी वाले गुच्छे बेचो, नकली दाढ़ी-मुंछें बेचो
चूरन कहता इमली बेचो, नींबू वाला पानी बेचो
मेहंदी लिपस्टिक डाई बेचो, बान से बनी चारपाई बेचो
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यह रचना उन लोगों के लिए है, जो आर्थिक अभाव से जूझ रहे हैं और कोई व्यापार करना चाहते हैं, तो केडी शर्मा ‘हाहाकारी’ की कलम से निकली यह कविता उनके लिए प्रेरणास्पद हो सकती है। इस रचना में यह बताया गया है कि चंद रुपयों में भी व्यापार शुरू करके पेट पाला जा सकता है। 
 
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हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे प्रमोद

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
राज्य अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष तनवीर हैदर उस्मानी ने कहा कि प्रमोद तिवारी के निधन की सूचना मिली, तो दो मिनट में ही वे सारे पल आंखों के सामने घूम गए, जो प्रमोद के साथ बीते थे। प्रमोद, जिसके घर का नाम पप्पू था और मैं उन्हें इसी नाम से पुकारता था, अचानक इस दुनिया से रुखसत हो जाएंगे, यह दिल मानने को तैयार नहीं हो रहा था, लेकिन सच्चाई यही है कि प्रमोद को हमने खो दिया। प्रमोद एक बहुत अच्छे पत्रकार और उम्दा कवि थे। मेरा उनसे परिचय उनके पिता ने कराया था। पहली मुलाकात में ही लगा कि प्रमोद के अंदर बहुत अच्छा पत्रकार है। इसके बाद कुछ ऐसा सिलसिला हुआ कि अखबार में वह मेरे सहकर्मी हो गए। उनके लिखे समाचारों को सब तारीफ करते थे।
 
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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने कई आयाम स्थापित किए। इसके बाद उनकी जिंदगी की दूसरी पारी जब कवि के रूप में शुरू हुई, तब में राजनीति में आ चुका था। अपनी रचनाओं में वे बेहद सरल भाषा का इस्तेमाल करते थे, लेकिन बात बहुत जानदार होती थी। उन्होंने कवि के रूप में भी खुद को राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया। मैं और मेरा पूरा परिवार बेहद गमजदा है क्योंकि प्रमोद उर्फ पप्पू हर दिल अजीज थे। मैंने अपना छोटा भाई खोया है, तो मेरी पत्नी ने देवर और बेटे ने चाचा। मुझे याद आता है कि प्रमोद अक्सर मेरे घर आते थे और आते ही मेरी पत्नी से पूछते थे कि भाभी, खाने में क्या बना है। अगर जवाब मिलता था कि दाल, तो वह झट से खाने के लिए बैठ जाते थे। ऐसी ही अनगिनत स्मृतियां हैं। बस, यही कहूंगा के प्रमोद मरे नहीं, वह हमारे दिल में हमेशा जिंदा रहेंगे। 
 
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कवि प्रमोद तिवारी के निधन पर शोक

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
सुप्रसिद्ध कवि प्रमोद तिवारी के निधन पर सोमवार को चंद्रशेखर आजाद जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। समिति के संस्थापक अध्यक्ष सर्वेश कुमार पांडेय उर्फ निन्नी ने कहा कि प्रमोद तिवारी आम लोगों के दर्द को शब्दों में उतार देते थे। 
नम आंखों से कवि प्रमोद तिवारी को दी अंतिम विदाई
कवि और पत्रकार प्रमोद तिवारी को अंतिम विदाई देने शहर के गणमान्य नागरिक, पत्रकार, कवि और नेता पहुंचे। कानपुर के भैरव घाट पर उनके बड़े बेटे संदेश तिवारी ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान सभी की आंखें नम थीं। उन्नाव में पोस्टमार्टम के बाद दोपहर करीब 1:30 बजे उनका शव एंबुलेंस से दर्शनपुरवा स्थित पैतृक आवास लाया गया। वहां पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनका शव पत्रकारपुरम स्थित आवास पर पहुंचा। वहां पर उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तनवीर हैदर उस्मानी, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप शुक्ला, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा और राजेंद्र मिश्रा बब्बू समेत तमाम लोगाें ने उनको श्रद्धांजलि दी।
 

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
शाम चार बजे कवि प्रमोद तिवारी की शवयात्रा भैरव घाट पहुंची। उनके अंतिम संस्कार के दौरान उद्योगपति नरेंद्र शर्मा, भाजपा नेता सुरेश अवस्थी, अपना दल (एस) के राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजेंद्र प्रताप सिंह, फुटकर दवा व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय मल्होत्रा, शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री, सैमुअल सिंह आदि मौजूद रहे। उधर, कानपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने प्रमोद तिवारी के निधन पर शोकसभा आयोजित की। चंद्रशेखर आजाद जनकल्याण समिति के पदाधिकारियों ने भी शोकसभा की।

 

प्रमोद तिवारी की मशहूर कविताएं...

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
याद बहुत
आते हैं
गुड्डे- गुड़ियों वाले दिन
दस पैसे में
दो चूरन की पुड़ियों
वाले दिन
ओलम, इमला, पाटी, बुदका
खड़ियों वाले दिन
बात-बात में
फूट रही
फुलझड़ियों वाले दिन
 

पनवाड़ी की चढ़ी उधारी

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
पनवाड़ी की चढ़ी उधारी
घूमे मस्त निठल्ले
कोई मेला-हाट न छूटे
टका नहीं है पल्ले
कॉलर खड़े किए
हाथों में घड़ियों वाले दिन
ट्रांजिस्टर पर
हवामहल की
कड़ियों वाले दिन
 

लिख-लिख, पढ़-पढ़ चूमें-फाड़ें

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
लिख-लिख, पढ़-पढ़
चूमें-फाड़ें
बिना नाम की चिट्ठी
सुबह दुपहरी शाम उसी की
बातें खट्टी-मिट्ठी
रुमालों में फूलों की
पंखुड़ियों वाले दिन
हड़बड़ियों में
बार-बार
गड़बड़ियों वाले दिन
 

सुबह-शाम की डंड-बैठकें

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
सुबह-शाम की
डंड-बैठकें
दूध पिएं भर लोटा
दंगल की ललकार सामने
घूमें कसे लंगोटा
मोटी-मोटी रोटी घी की
भड़ियों वाले दिन
गइया, भैंसी, बैल, बकरियाँ
पड़ियों वाले दिन
 

दिन-दिन बरसे पानी

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
दिन-दिन बरसे पानी
भीगे छप्पर
आँखें मींचे
बूढ़ा दबा रही हैं झाडू
सिलबट्टा के नीचे
टोना सब बेकार
जोंक, मिचकुड़ियों वाले दिन
घुटनों-घुटनों पानी
फुंसी-फुड़ियों वाले दिन
 

घर भीतर मनिहार चढ़ाए

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
घर भीतर
मनिहार चढ़ाए
चुड़ियां कसी-कसी सी
पास खड़े
भइया मुसकाएं
भौजी फंसी-फंसी सी
देहरी पर
निगरानी करतीं
बुढ़ियों वाले दिन
बाहर लाठी-मूंछें
और पगड़ियों वाले दिन
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तेज धार करती बंजारन

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
तेज धार करती
बंजारन
चक्का खूब घुमाए
दाब दांत के बीच कटारी
मंद-मंद मुसकाए
पूरा गली-मोहल्ला घायल
छुरियों वाले दिन
दुरियों-छुरियों
छूट रही
छुरछुरियों वाले दिन
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‘शोले’ देख छुपा है ‘वीरू’

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
‘शोले’ देख
छुपा है ‘वीरू’
दरवाजे के पीछे
चाचा ढूंढ रहे हैं
बटुआ फिर
तकिया के नीचे
चाची बेंत
छुपाती घूमें
छड़ियों वाले दिन
हल्दी गर्म दूध के संग
फिटकरियों वाले दिन
 

ये वो दिन थे जब हम लोफर

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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
ये वो दिन थे
जब हम लोफर
आवारा कहलाए
इससे ज्यादा
इस जीवन में
कुछ भी कमा न पाए
मंहगाई में
फिर से वो
मंदड़ियों वाले दिन
कोई लौटा दे
चूरन की
पुड़ियों वाले दिन
 
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प्रमोद तिवारी की पुरानी तस्वीर
-‘शोले’ हिंदी सिने जगत की सफलतम फिल्म
-‘वीरू’ फिल्म का नायक
-‘हवा महल’ आकाशवाणी की लोकप्रिय नाटिका
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