हिंदी सिनेमा सुप्रसिद्ध फिल्म अमर प्रेम के एक गीत की दो पंक्तियां बड़ी मशहूर रही है- मझधार में नैया डोले तो मांझी पार लगाए, मांझी जो नाव डुबोये, उसे कौन बचाये। ये पंक्तियां रेलवे विभाग की कार्यशैली पर उस समय सटीक बैठीं जब यूपी के कानपुर में ट्रेन रास्ता भटक गई। जानें क्या है पूरा मामला...
विज्ञापन
2 of 4
डेमो पिक
बरौनी-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन लखनऊ स्टेशन से दोपहर 12.20 बजे के बजाय ढाई बजे छूटी। आलमबाग केबिन के पास से यह ट्रेन कानपुर रूट के बजाय मुरादाबाद रूट पर चल दी। दो किलोमीटर आगे चलने के बाद जब यात्रियों और ड्राइवर को ट्रेन के गलत रूट पर चलने का पता चला, तो ट्रेन वापस आलमबाग केबिन के पास गई। इसके बाद पौने तीन बजे कानपुर रूट पर ट्रेन चली। बीच में कॉशन होने की वजह से ट्रेन कुछ देर धीमी भी चली।
विज्ञापन
3 of 4
डेमो पिक
ट्रेन को ढाई बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचना था, लेकिन यह पहले से ही दो घंटे देरी से चल रही थी। इसके बाद गलत रूट पर चले जाने यह ट्रेन दो घंटे और लेट हो गई। कुल मिलाकर यह ट्रेन कानपुर सेंट्रल पर चार घंटे देरी से साढ़े छह बजे पहुंची।
उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी विनोद कुमार के मुताबिक, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी लखनऊ स्टेशन के अफसरों से की जाएगी। वहीं जानकार बताते हैं कि ड्राइवर अपने मन से ट्रेन का रूट नहीं बदल सकता। उसे सिग्नल ही गलत मिला होगा, तभी ट्रेन मुरादाबाद रूट पर चली गई।