कानपुर देहात में बुधवार सुबह भीषण सड़क हादसा हुआ। गुजरात के अहमदाबाद से प्रवासी मजदूर डीसीएम में बैठकर बलरामपुर जा रहे थे। कानपुर-झांसी हाईवे पर अकबरपुर कोतवाली के लालपुर चौकी क्षेत्र में खड़े ट्रक में पीछे से डीसीएम भिड़ गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि 55 मजदूर घायल हैं। जिसमें से 6 मजदूरों को कानपुर रेफर किया गया है।
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घटना के बाद मौके पर पहुंचे आधिकारी
- फोटो : amar ujala
कानपुर देहात में बलरामपुर के पनवापुर उतरौला के शफीक को सड़क हादसा न भूलने वाला गम दे गया। लॉकडाउन में फंसा परिवार घर वापसी को निकला तो शफीक व उसका भाई आजम अली बेहद खुश थे। घर कब आएगा यह सवाल चार वर्षीय बच्ची सौमैया बार-बार चाचा से आजम से पूछ रही थी। वह उसे दिलासा देता कि जल्द ही घर आएगा।
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हादसे के बाद का नजारा
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इसी बीच हादसा हो गया। सौमैया की मौत पर परिवारी बिलख पड़े। आजम अली मृत सौमैया को गोद में लेकर काफी देर अस्पताल में दीवार पर टेक लगाकर बैठा रहा। बीच-बीच में वह कहता कुछ तो बोलो, आंखें खोलो सौमैया, अब घर आने वाला है। वहां तुम खूब खेलना, अब कोई नहीं रोकेगा। यह देखकर स्वास्थ्य व पुलिस कर्मियों की भी आंख भर आई। वहीं संत कबीर नगर, मुसायरा निवासी रीमा, उसकी तीन वर्षीय बेटी श्रद्धा, पांच वर्ष की प्रज्ञा घायल हो गई। दर्द से कराहते बच्चों को जल्द ठीक होने का ढांढस बंधाती रीमा खुद अपना दर्द छिपाती रही।
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घटना के बाद लगी भीड़
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चीख-पुकार के बीच अपनों को तलाशते रहे घायल
लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूर के मन में जल्द घर पहुंचने की खुशी थी। सुबह कुछ उस नीदें से थे, तो कुछ बच्चों को संभाल रहे थे। कष्ट भरी यात्रा के बीच हादसा हुआ तो सामान बिखरने के साथ लोग सड़क पर जा गिरे। चीख-पुकार के बीच घायल अपनों की तलाश करते रहे।
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पीड़ितों से पूछताछ करते अधिकारी
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मनीषा को अस्पताल में मिले घायल भाई
हादसा स्थल पर रो रही बलरामपुर की मनीषा ने बताया कि पिता व तीन भाइयों के साथ थी। हादसे के बाद डीसीएम से बाहर आ गिरी। वह काफी देर तक परिजनों की तलाश करती रही। कई घंटे तक उनका पता नहीं चल सका। एक पुलिस कर्मी ने जिला अस्पताल जाने को कहा। वहां इमरजेंसी में घायल परिजन भर्ती मिले, लेकिन सामान गुम हो गया।
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हादसे के बाद मच गई थी चीखपुकार
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तेज धमाका और मच गई चीत्कार
हादसे में घायल बलरामपुर के उतरौला बनवापुर निवासी अलीमुन्निशा ने बताया कि उनके परिवार के 25 लोग अहमदाबाद में दीवारों पर पुट्टी, रंग-रोगन का काम करते थे। सोमवार को निकले थे। चालक डीसीएम तेज रफ्तार से चला रहा था। कई बार मना किया, लेकिन नहीं माना। इस बीच उसे झपकी लगी और हादसा हो गया।
थम गईं बेटे की सांसें तो पिता घंटों सीने से चिपकाए बैठा रहा
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तेज धमाके से टूटी नींद तो सड़क पर थे
उतरौला के ही तौफीक ने बताया कि चालक ने भोर पहर डीसीएम हाईवे किनारे रोकी थी। कुछ देर बाद वह चल दिया था। तेज धमाका हुआ तो नींद टूट गई। होश आया तो खुद को सड़क पर पाया। लोग चीखते हुए इधर-उधर दौड़ रहे थे।