शादी एक ऐसा पवित्र बंधन है जिसे यादगार बनाने के लिए वर और वधू दोनों पक्ष हर संभंव प्रयास करतें हैं। हर दूल्हा शादी में अपने लिए लग्जरी से लग्जरी कार का इंतजाम करता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी बारात से रूबरू कराते हैं जिसे देखकर न केवल आप अचंभित हो सकते हैं बल्कि इससे आपको एक सीख भी मिलेगी।
आगे की स्लाइड में- प्रकृति और पर्यावरण का शानदार सम्मान किया
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बांदा में यादगार शादी
- फोटो : अमर उजाला
यूपी के बुंदेलखंड में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की चौतरफा होड़ के बीच दुर्गम क्षेत्र में आबाद एक गांव में प्रकृति और पर्यावरण का शानदार सम्मान किया गया।
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बांदा में यादगार शादी
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कोशिश छोटी, पर महत्वपूर्ण थी। नरैनी क्षेत्र के मोहनपुर खलारी गांव में किसान संतोष कुमार पटेल ने अपनी बेटी प्रीति की शादी के सारे आयोजन और रस्में प्रकृति को समर्पित होकर की हैं।
आगे की स्लाइड में- कहारों के कांधों पर डोली में सवार हुआ दूल्हा
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बांदा में यादगार शादी
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पुरानी परंपरा को ताजा करते हुए रंग-बिरंगी पोशाक (झूल) पहने बैलों वाली सजी-धजी दर्जनभर बैलगाड़ियों में बारात आई। कहारों के कांधों पर डोली में दूल्हा सवार हुआ। हरे पत्तों के मंडप में फेरे लिए। छ्यूल के पत्तों पर बारातियों को भोजन परोसा गया। दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ पौधरोपण किया। विदाई में हरेक बाराती को एक पौधा रोपने के संकल्प के साथ उपहार में दिया गया।
आगे की स्लाइड में- पड़ोसी गांवों के लोग इकट्ठा रहे
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बांदा में यादगार शादी
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खलारी और आसपास के इलाकों में अजब रीति से हुई प्रीति की अनोखी शादी देखने के लिए पड़ोसी गांवों के लोग इकट्ठा रहे। बांदा मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश की सरहद के बीच आबाद खलारी गांव में सोमवार (25 जून)की रात खास थी।
आगे की स्लाइड में- खजूर की मौर और जामा पहने दूल्हा
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किसान संतोष कुमार पटेल की बेटी की बारात पड़ोसी मध्य प्रदेश के सरबई (छतरपुर) गांव से आई थी। खजूर की मौर और जामा पहने दूल्हा सुरेंद्र बैलगाड़ी पर सवार था। सुरेंद्र स्नातक हैं। यह कारोबार करते हैं।
आगे की स्लाइड में- बैलगाड़ियों का काफिला गांव से सात किलोमीटर दूर
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दुल्हन प्रीति इंटर की छात्रा है। बाराती बैलगाड़ियों का काफिला गांव से सात किलोमीटर दूर शंकर बाजार मोड़ से शाम 5 बजे शुरू हुआ। रात करीब 8 बजे बारात खलारी गांव पहुंची। लगभग दो सैकड़ा बाराती थे।
आगे की स्लाइड में- बारातियों को मिर्चवान परोसा गया
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जनवासे में बारातियों को मिर्चवान परोसा गया। दुल्हन प्रीति पीले परिधान में थी। हरे पत्तों तले गाड़े गए मंडप तक दूल्हा को कहारों के कांधों पर रखी पालकी से लाया गया।
आगे की स्लाइड में- मिट्टी के कुल्हड़ में पानी परोसा गया
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फेरे आदि की रस्म के बाद दूल्हा-दुल्हन ने एक साथ शादी स्थल के पास ही आंवला और जामुन का एक-एक पौधा रोपा। बारातियों को सादगी से छ्यूल के पत्तों में भोजन और मिट्टी के कुल्हड़ में पानी परोसा गया।
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खलारी गांव की इस शादी को ग्रीन मैरिज बनाने का पूरा श्रेय दुल्हन प्रीति के चाचा अध्यापक यशवंत पटेल और उनकी ग्राम प्रधान पत्नी सुमनलता पटेल को रहा। पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रवास सोसायटी के आशीष सागर दीक्षित कन्या पक्ष की ओर से पूरे समय मेजबानी में रहे।
आगे की स्लाइड में-वन विभाग ने उपलब्ध कराए थे
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उन्होंने बताया कि बारातियों को सौगात देने के लिए पौधे वन विभाग ने उपलब्ध कराए थे। शादी के मौके पर वन रेंजर जेके जायसवाल और वन दरोगा धर्म नारायण द्विवेदी व हरीकांत भी उपस्थित रहे। वन रेंजर ने बारातियों को पर्यावरण सुरक्षा की शपथ दिलाई।
आगे की स्लाइड में-पर्यावरण संरक्षण का पैगाम देने वाली अनोखी बारात
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पर्यावरण संरक्षणका पैगाम देने वाली अनोखी बारात मंगलवार (26 जून) को दोपहर दुल्हन को लेकर विदा हो गई। दुल्हन की चाची और ग्राम प्रधान सुमनलता पटेल ने विदाई के समय सभी बारातियों को पंक्तिबद्ध खड़ा कर एक-एक पौधे की सौगात दी।
दूल्हा पक्ष के रामरतन पटेल, कल्लू प्रसाद और नत्थू मुखिया आदि से संकल्प लिया कि इन पौधों को रोपकर देखरेख करेंगे। साथ ही घर-परिवार में होने वाले अन्य विवाह भी इसी तर्ज पर करेंगे।