बिकरू कांड में निलंबित किए गए तत्कालीन एसएसपी अनंत देव शुरू से ही सवालों के घेरे में रहे। चौबेपुर एसओ पर कार्रवाई से बचना और जय बाजपेई से याराना उन्हें ले डूबा। इतना ही नहीं विकास दुबे पर भी उन्होंने खूब नरमी दिखाई। एसआईटी ने अपनी जांच में इस बात का भी जिक्र किया है कि उन्होंने शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा की शिकायतों को भी नजरअंदाज किया।
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बिकरू कांड
- फोटो : amar ujala
एसएसपी सीओ की शिकायतों को गंभीरता से लेकर एसओ पर कार्रवाई करते तो शायद आठ पुलिस वालों की जान नहीं जाती। अनंत देव करीब दो साल तक शहर में एसएसपी रहे। बिकरू कांड के बाद उनकी परतें खुलनी शुरू हुईं। सबसे पहले अमर उजाला ने खुलासा किया था कि सीओ देवेंद्र मिश्र ने बिकरू कांड के आरोपी चौबेपुर के पूर्व एसओ विनय तिवारी के खिलाफ एक के बाद एक आठ बार एसएसपी से शिकायत की।
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अनंत देव तिवारी व जय वाजपेयी।
- फोटो : amar ujala
उसे हटाने की भी सिफारिश की गई। मगर एसएसपी अनंत देव ने शिकायतें नजरअंदाज कर दीं। नतीजतन उसे एसओ की मुखबिरी की वजह से विकास दुबे ने अपने साथियों के साथ मिलकर सीओ समेत आठ पुलिस वालों को निशाना बनाया। जांच में ये भी सामने आया कि जय बाजपेई से अनंत देव की करीबी रही।
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पूर्व एसएसपी कानपुर अनंत देव के साथ विकास का साथी जय
- फोटो : amar ujala
आपराधिक इतिहास होते हुए जय लाइसेंसी असलहे रखता था और अवैध संपत्ति अर्जित करने में तत्कालीन एसएसपी की शह रहती थी। इसके अलावा विकास दुबे पर दर्ज रंगदारी व अन्य धाराओं के केस में चौबेपुर पुलिस ने रंगदारी की धारा हटा दी थी। इसकी जानकारी सीओ ने एसएसपी को दी थी मगर उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसआईटी ने इन तथ्यों को जांच में शामिल किया।
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विकास दुबे के करीबी जय का सटोरियों से कनेक्शन
- फोटो : अमर उजाला
भ्रष्टाचार के लगे आरोप, जांच में बने आधार
बिकरू कांड से संबंधित तीस से अधिक कॉल रिकॉर्डिंग्स अब तक वायरल हो चुकी हैं। इसमें अधिकतर रिकार्डिंग सीओ की हैं। ज्यादातर रिकॉर्डिंग में सीओ ने खुलकर अनंत देव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। चाहे वो एक पूर्व डीजीपी से बातचीत की रिकॉर्डिंग हो या वर्तमान एसपी ग्रामीण से। इसके अलावा भी कई विवादित रिकॉर्डिंग वायरल हुईं, जिनमें अनंत देव पर आरोप लगे हैं। एसआईटी की जांच में इन सभी आरोपों पर मुहर लगी है। बाकी विभागीय जांच में आगे तथ्य समाने आएंगे।
वायरल पत्र भी था सही, आईजी रेंज लखनऊ ने भी की थी सिफारिश
सीओ देवेंद्र मिश्र ने एक पत्र एसएसपी को भेजा था। इसमें आरोपी एसओ विनय तिवारी पर जुआ खिलाने और विकास दुबे का साथ देने का आरोप था। उसी आधार पर उसको हटाने की सिफारिश सीओ ने की थी। बिकरू कांड के बाद ये पत्र वायरल हुआ था। अनंत देव ने खंडन किया था कि पत्र फर्जी है और उन्हें मिला ही नहीं। मगर पहली जांच जब आईजी रेंज लखनऊ ने की थी तब खुलासा हुआ था कि पत्र सही था। वहीं एसआईटी ने इसको जांच में शामिल किया। एसआईटी ने भी ये पत्र सही पाया और अनंत देव का दावा झूठा निकला।