अरे! ये क्या, बागी जिंदगी से ही बगावत कर गया। ऐसे भी कोई करता है क्या? फिल्म सोन चिड़िया में बागी का दमदार किरदार निभाने वाले सुशांत राजपूत की आत्महत्या की खबर सुन स्तब्ध प्रशंसकों की जुबान से यही शब्द फूटे।
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अमर उजाला के बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने कानपुर आए थे सुशांत
- फोटो : अमर उजाला
24 फरवरी 2019 को अमर उजाला के बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में पीएसआईटी में सुशांत, भूमि पेडनेकर और रणबीर शौरी ने बीहड़ के बागियों के साथ सीधे बातचीत की थी। तब उन्होंने कहा था कि हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी बागी बनता है।
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अमर उजाला के बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने कानपुर आए थे सुशांत
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कुछ ऐसी परिस्थितियां उसके सामने आती हैं, जब वह खुद को अकेला महसूस करता है। ऐसे समय वह जो फैसला लेता है, उसी से वह बागी कहलाने लगता है। सुशांत ने कॉलेज के अपने दिनों को भी याद किया था। कहा था कि कानपुर उन्हें बहुत खूबसूरत लगा, फिर आएंगे। लेकिन, ऐसा इंतजार दे गए, जो कभी न खत्म होगा।
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अमर उजाला के बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने कानपुर आए थे सुशांत
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- 2020 बहुत ही बुरी खबरें साथ लेकर आ रहा है। सुशांत की आत्महत्या की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। समझ नहीं आ रहा आखिर ऐसी क्या वजह रही कि वह जिंदगी हार गए। - रतन राठौर, अभिनेता
- बहुत दुख हुआ कि बागी जिंदगी से ही बगावत कर गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। उनके अभिनय और जिंदादिली का कायल हमेशा रहूंगा। बस सवाल ये ही है कि ऐसा कदम उन्होंने उठाया क्यों। - उमेश शुक्ला, सीनियर थियेटर आर्टिस्ट
अमर उजाला के बागी बोलता है संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेने कानपुर आए थे सुशांत
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- सुशांत के निधन से मन बहुत व्यथित है। फिल्म इंडस्ट्री को जैसे किसी की बुरी नजर लग गई है। सुशांत एक बेहद मिलनसार और हंसमुख व्यक्तित्व वाले एक्टर थे। - अग्रज पांडे, थियेटर आर्टिस्ट
- मुंबई में अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान 2018 में उनसे मिला था। उनका नेचर और अभियन काबिले तारीफ था। इतने कम समय में इतनी ऊंचाइयां पा लीं, उनको कभी न भूल पाएंगे। - मो. आलम, फिल्म निर्माता, एक्टर