साधारणता हर सवंत्सर में 5 से अधिक ग्रहण नहीं पड़ते है। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से लेकर अगले वर्ष चैत्र कृष्ण अमावस्या तक अनेक ग्रहण पड़ेंगे। डा. आदित्य पांडेय और पंडित पवन तिवारी ने बताया कि जुलाई 27 की रात को पूर्ण चंद्रग्रहण पड़ेगा। इसके बाद 21 जनवरी 2019 को भी आंशिक चंद्रग्रहण होगा। वहीं आंशिक सूर्यग्रहण 13 जुलाई को पड़ेगा, जो दक्षिणी हिंद महासागर में दिखाई देगा। जानें ग्रहण के प्रकोप से बचने के उपाय...
विज्ञापन
ऐसे पड़ता है चंद्रग्रहण
2 of 4
डेमाे पिक
चंद्रमा और सूर्य के बीच पृथ्वी के आ जाने को ही चंद्रग्रहण कहते है। चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य व चंद्रमा के बीच पृथ्वी इस प्रकार से आ जाती है कि पृथ्वी की छाया से चंद्रमा का पूरा या आंशिक भाग ढक जाता है। ऐसी स्थिति में पृथ्वी सूर्य की किरणों के चंद्रमा तक पहुंचने में अवरोध लगा देती है। तब पृथ्वी के उस हिस्से में चंद्रग्रहण नजर आता है। इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा की रात में घटित हो सकता है।
विज्ञापन
ग्रहण पड़ने का कारण
3 of 4
डेमाे पिक
ऐसी मान्यता है कि जब सूर्य अथवा चंद्रमा के निकट राहु अथवा केतु आ जाते है। ऐसी स्थिति वह सूर्य अथवा चंद्रमा को निष्प्रभावी कर देते है। इस स्थिति को हम ग्रहण काल कहते है। ग्रहण के समय जन्मे बच्चों को जीवन में अत्याधिक परिश्रम करना पड़ता है। चंद्रग्रहण के समय जन्मे बच्चों को तीक्ष्ण बुद्धि के होते हैं परंतु उनकी शिक्षा बाधित होती है। ऐसे ही सूर्य ग्रहण में जन्मे बच्चों को पिता के सुख में कमी रहती है तथा अधिक समय अपने माता-पिता से दूर रहते है।
जिनकी कुंडली में सूर्य अथवा चंद्रग्रहण का दोष हो तो उनको अपने जीवनकाल में पड़ने वाले हर पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं चंद्रग्रहण के समय सूर्य अथवा चंद्रमा का दान करना चाहिए। इसमें काले तिल, सफेद तिल, काली उड़द एवं गेहूं शामिल है। किसी एक ग्रहण पर तुला दान अवश्य करें।