गुजरात के पालम से स्पेशल ट्रेन 1295 श्रमिकों को लेकर फर्रुखाबाद स्टेेशन पहुंची। इसमें फर्रुखाबाद के साथ अन्य जनपदों के लोग भी थे। लॉकडाउन में फंसे इन श्रमिकों के चेहरों पर घर जाने की खुशी के साथ वह दर्द भी था, जो उन्होंने लॉकडाउन में घर से दूर दूसरे प्रदेश में भूखे-प्यासे झेला है।
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गुजरात से स्पेशल ट्रेन 1295 श्रमिकों केे लेकर फर्रुखाबाद पहुंची
- फोटो : अमर उजाला
पर जब उनसे बात की तो उन्होंने घर पहुंचने की खुशी के आगे वहां के दर्द को कम ही बताया। जनपद हरदोई के पाली निवासी सोनवती पत्नी निशू अपने एक साल के मासूम बेटे आयुष को गले से लगाकर चुप करने का प्रयास कर रही थीं।
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पर बेटा चुप नहीं हो रहा था। होता भी कैसे उसका पेट जो खाली था। मां दूध न होने से उसे बार-बार चम्मच से पानी पिलाकर चुप कराने की कोशिश कर रही थी। सोनवती ने बताया कि वह पति के साथ भट्ठे पर काम करती थी।
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लॉकडाउन में काम बंद हो गया। भट्ठा मालिक ने जो पैसे दिए वह बड़े के इलाज में खर्च हो गए। 480 रुपये की एक टिकट आई। जब गुरुवार शाम को सात बजे ट्रेन पर सवार हुए तो थोड़ा दूध था। वह रास्ते में ही बच्चे ने पी लिया।
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खिलाने के लिए बिस्कुट भी नहीं है। इससे बेटा चुप नहीं हो रहा है। ऐसी ही दर्द भरी कहानी हर उस प्रवासी श्रमिक की है जो ट्रेन से फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचा। जालौन निवासी लाखन पालम में पकौड़ी का ठेला लगाते थे।
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लॉकडाउन हुुआ तो ठेला लगना बंद हो गया। उनके साथ उनकी पत्नी सोनकली व बेटी साधना भी किराए के मकान में रहती थीं। लॉकडाउन में जमा पूंजी खर्च हो गई। मकान मालिका ने भी किराया वसूल लिया।
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अब जेब में कुछ नहीं बचा। सरकारी राशन भी कुछ दिन ही चल सका। ऐसे में भुखमरी की नौबत आ गई। ट्रेन आने का पता चला तो किसी तरह जोड़ जुगाड़ कर टिकट का पैसा एकत्र किया और घर के लिए ट्रेन में सवार हो गए। भूखे-प्यासे लाखन बताते हैं अब वह बाहर कमाने नहीं जाएंगे। स्टेशन पर भोजन का पैकेट मिला तो उनके चेहरे में कुछ खुशी नजर आई।