जहर खाने वाले कानपुर एसपी (पूर्वी) सुरेंद्र कुमार दास की हालत शनिवार को और बिगड़ गई। वह मल्टी आर्गन फेल्योर में चले गए हैं अर्थात उनके कई अंग काम नहीं कर रहे हैं। दोपहर में उनके पैर की नस में जमा खून का थक्का निकालने के लिए आपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने उनकी हालत बहुत गंभीर बताई है। एसपी को 5 सितंबर को सुबह सल्फास खाने के बाद रीजेंसी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। मुंबई के सृष्टि इंस्टीट्यूट आफ क्रिटिकल केयर के इंटेसीविस्ट डॉ. प्रणव ओजा, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वेंकट गोपाल और रीजेंसी के इंटेसीविस्ट डॉ. आदित्य शुक्ला, फिजीशियन डॉ. प्रदीप सहगल उनका इलाज कर रहे हैं। वेंटीलेटर सहित अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम के साथ ही एक्मो (एक्स्ट्रा कॉरपोरियल मेंब्रेन आक्सीजेनेटर) मशीन के सहारे उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।
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एसपी के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
रीजेंसी के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि सुरेंद्र दास को सुबह मल्टी आर्गन फेल्योर हो गया। सुरेंद्र कुमार दास के बाएं पैर की नस में खून का थक्का जम गया। इससे पैर सुन्न हो गया था। दोपहर में कार्डियो वैस्कुलर सर्जन डॉ. सईद अख्तर सहित पांच डॉक्टरों की टीम ने इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आपरेशन किया। डेढ़ घंटे चले आपरेशन के दौरान नस में जमा खून का थक्का हटाया गया, लेकिन देर शाम तक पैर में रक्त का प्रवाह शुरू नहीं हुआ। सात-आठ घंटे बीतने के बाद यह पता चल सकेगा कि आपरेशन कितना सफल रहा। किडनी और दूसरे अंग मल्टी आर्गन फेल्योर में चले गए हैं। उनकी हालत अति गंभीर बनी हुई है।
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एसपी सुरेंद्र की हालत बहुत गंभीर
एसपी पूर्वी सुरेंद्र दास के जोखिम भरे आपरेशन के लिए स्वीकृति देते वक्त शनिवार को परिजनों के हाथ कांप गए। डाक्टरों ने आपरेशन के संबंध में घरवालों को पहले ही बता दिया था कि इससे फायदा हो सकता है और हो भी नहीं सकता। लेकिन आखिरी रास्ता भी यही है। इस पर घरवालों ने कहा कि डाक्टर साब, आपरेशन कीजिए, बाकी हमारी किस्मत है कि क्या होता है। एसपी के अॉपरेशन से पहले कंसेंट लेटर पर सबसे पहले उनकी पत्नी डॉ. रवीना सिंह के दस्तखत कराए गए।
इसके बाद एसपी के घरवालों और ससुराल पक्ष के लोगों ने आपरेशन की स्वीकृति दिए जाने के संबंध में दस्तखत किए। एसपी पश्चिमी के बतौर गवाह दस्तखत कराए गए। आईसीयू में ही अस्थायी तौर पर छोटा आपरेशन थिएटर बनाकर परेशन किया गया। रीजेंसी हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि बाएं पैर में खून का प्रवाह बंद हो गया है। इसीलिए कार्डिएक सर्जन ने आपरेशन की सलाह दी। इसमें रिस्क यह है कि जो दवाएं चल रही हैं उनके प्रभाव से ब्लीडिंग अधिक हो सकती है।