अक्सर अाप कहीं पर खड़े हाेते हैं ताे सिगरेट का धुअां अापकाे परेशान करता है एेसे में अब कभी भी यह अापके लिए खतरे की घंटी बजा सकता है। सिगरेट का धुअां भी उतना ही नुकसान करता है जितना नुकसान एक सिगरेट पीने वाले काे हाेता है। भारतीय बाल रोग अकादमी (आईएपी) की तरफ से आयोजित अस्थमा कैंप में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. सुनील तनेजा ने बताया कि सिगरेट के धुएं, पेंट से भी अस्थमा हो सकता है। स्वरूप नगर स्थित क्लीनिक में रविवार को अस्थमा पीड़ित बच्चों काे यह जानकारी दी गई। अभिभावकों को इस बीमारी से जागरूक करने के लिए आयोजित इस कैंप में डा. तनेजा ने बताया कि अस्थमा दो तरह का होता है। पहला, बाहरी अस्थमा जो परागकणों, जानवरों, धूल जैसी बाहरी एलर्जी चीजों से होता है। दूसरा, आंतरिक अस्थमा जो सांस लेते समय सिगरेट का धुआं, पेंट की गंध आदि श्वांस नली में पहुंचने से होता है। इस रोग में श्वांस नलियों में सूजन आ जाती है। श्वसन मार्ग सिकुड़ जाने से सांस लेने में दिक्कत होती है। सांस लेते समय आवाज आना, सांस की कमी, खांसी आने लगती है। संचालन आईएपी के सचिव डा. अमित चावला ने किया।