2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस महानगर लोकसभा सीट से किसे मैदान में उतारेगी, इससे ज्यादा चर्चा की बात यह है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने फिर से ताल ठोंक दी है। 74 साल के हो चुके श्रीप्रकाश ने कहा है कि वे अभी बूढ़े नहीं हुए हैं, 2019 की तैयारी में जुटे हैं। दरअसल, पिछला चुनाव हारने के बाद कई बार यह कहते सुने गए थे कि अब वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस बीच उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस से कई नाम सामने आ चुके हैं। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री का ताल ठोंकना कांग्रेसियों और उनके समर्थकों के लिए चौंकाने वाली बात है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल
लगातार तीन बार महानगर लोकसभा सीट से सांसद और दो बार केंद्रीय मंत्री रहे, श्रीप्रकाश इस वर्ष 26 मार्च को पूरे 74 वर्ष के हो गए हैं। कांग्रेस कमेटी ने वैसे अभी तक प्रत्याशियों की उम्र को लेकर कोई नियम नहीं बनाया है, फिर भी पार्टी के बीच यह बात मानी जा रही है कि श्रीप्रकाश की जगह कोई और लोकसभा चुनाव लड़ेगा। मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अपने समर्थकों के बीच इस बात का खुलासा किया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह घर से रोजाना चुनावी तैयारी के लिए ही निकलते हैं। दिन भर लोगों से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना, यह काम लगातार कर रहे हैं। उनकी उम्र को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो बोले वे पूरी तरह फिट हैं।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल
2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से ही कांग्रेसियों और समर्थकों में यह बात चलने लगी थी कि श्रीप्रकाश की जगह कौन लेगा। इसमें दो नाम उभरकर आ रहे हैं। पहला, तीन बार के विधायक रहे अजय कपूर और पार्टी के वरिष्ठ नेता आलोक मिश्रा। ये दोनों भी अपनी-अपनी तैयारी में जुटे हैं। दोनों की तैयारी की अपनी-अपनी वजहें भी हैं। वहीं अजय कपूर का कहना है कि कोई भी आए, वे इस बार लोकसभा चुनाव के लिए पूरी दमखम से तैयारी कर रहे हैं।
जैसा दिख रहा है कि इस बार लोकसभा का चुनाव कांग्रेस, सपा और बसपा के साथ मिलकर लड़ेगी। ऐसे में कहा जा रहा है कि यदि कांग्रेस को सीट मिलती है तो उसमें प्रत्याशी के रूप में अजय कपूर को तवज्जो मिल सकती है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि अजय कपूर को सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का भी सहयोग मिल सकता है। यदि गठबंधन नहीं हुआ और उम्रदराज होने की वजह से श्रीप्रकाश को भी टिकट नहीं मिलता है तो ऐसी स्थिति में कहा जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अपनी जगह आलोक मिश्रा का समर्थन कर सकते हैं।