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Kanpur: संजीत अपहरण हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, बदमाशों को दिए गए बैग में नहीं थे फिरौती के 30 लाख रुपये

Fri, 11 Dec 2020 09:04 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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संजीत मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। अपहर्ताओं को दिए गए बैग में फिरौती के 30 लाख रुपये नहीं थे। उसमें कुछ नकली करेंसी व एक मोबाइल था। यह खुलासा आईपीएस बीपी जोगदंड की जांच में हुआ है। जांच अफसर ने शासन को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। बर्रा निवासी संजीत 22 जून की शाम को लापता हो गया था।

 
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संजीत मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
29 जून को परिजनों के पास 30 लाख फिरौती के लिए फोन पहुंचा था। तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता, तत्कालीन सीओ गोविंद नगर मनोज कुमार गुप्ता व तत्कालीन बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत राय ने अपहर्ताओं को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 13 जुलाई को गुजैनी बाईपास के पास बदमाश फिरौती लेने पहुंचे। संजीत के पिता भी पुलिस के साथ पहुंचे। नीचे खड़े बदमाशों ने हाईवे से बैग फिंकवाया और फरार हो गए।

 
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संजीत मर्डर केस - फोटो : amar ujala
23 जुलाई को खुलासा हुआ कि संजीत के दोस्तों ने उसकी हत्या कर शव पांडु नदी में बहा दिया है। तब परिजनों ने आरोप लगाया था कि बैग में फिरौती के 30 लाख रुपये थे, जबकि पुलिस का दावा था कि उसमें नकली नोट व मोबाइल था। शासन ने इस मामले की जांच आईपीएस बीपी जोगदंड को सौंपी थी। सूत्रों के मुताबिक आईपीएस ने बयानों और साक्ष्यों के आधार पर माना है कि बैग में रुपये नहीं थे। यह जरूर माना है कि मामले में पुलिस की लापरवाही रही है। 

 

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संजीत मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
जांच अधिकारी ने इन बिंदुओं को बनाया आधार
- संजीत के परिजनों ने दावा किया था कि घर बेचकर 30 लाख रुपये जुटाए हैं, जांच में घर बेचने की पुष्टि नहीं हुई। 
- घटना के दौरान परिजनों के खातों से भी रुपये नहीं निकाले गए हैं।
- संजीत के पिता के वायरल हुए एक वीडियो को भी आधार बनाया है, जिसमें वे कह रहे थे कि बैग में रुपये होते भी तो क्या, बेटा तो उनका चला गया। 
- कई अन्य लोगों और पुलिस वालों से पूछताछ में भी बैग में रुपये होने की पुष्टि नहीं हुई। 

 
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
रुपये होते तो पुलिस वालों पर होती रिपोर्ट
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि पुलिस की लापरवाही की वजह से रुपये भी चले गए और बदमाश भी नहीं पकड़े गए। शासन के एक बड़े अफसर का कहना है कि अगर बैग में रुपये होने के आरोप सही होते तो पुलिसकर्मियों पर भी केस दर्ज होता। यही वजह है कि इस मामले मेें सस्पेंड हुईं आईपीएस अपर्णा गुप्ता को बहाल कर दिया गया है। 

 
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
एक डीएसपी बाल-बाल बच गए 
कानपुर में कई थानों में इंस्पेक्टर रहे मनोज कुमार रघुवंशी इसी साल डीएसपी के पद पर प्रमोट हुए हैं। अपहरण हत्याकांड के दौरान उनका तबादला सुलतानपुर हो गया था। मगर इंस्पेक्टर रणजीत राय के साथ मिलकर वो इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए शहर आए थे। जब बदमाश फिरौती लेने पहुंचे थे तो डीएसपी मनोज रघुवंशी भी टीम के साथ मौजूद थे। हालांकि वो मामले में बाल-बाल बच गए। 

 
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड - फोटो : amar ujala
इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मी दोषी
हत्याकांड के बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर रणजीत राय, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार, दरोगा योगेंद्र प्रताप, सिपाही विनोद कुमार, मनीष, शिव प्रताप, दिशु भारती और सौरभ पांडेय को निलंबित कर दिया गया था। इंस्पेक्टर रणजीत राय की जांच सीओ बाबूपुरवा ने की जबकि अन्य सात पुलिसकर्मियों की जांच एसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल ने की। जांच में ये सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। जांच अधिकारी जल्द ही रिपोर्ट डीआईजी को भेजेंगे। इसके बाद विभागीय कार्रवाई होगी।
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