समाजवादी पार्टी में शिवपाल सिंह के तीखे तेवरों ने एक बार फिर उरई (जालौन) के दिग्गज सपा नेताओं में खलबली मचा दी है। माना जा रहा है कि भले ही लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा का गठबंधन हो जाए, लेकिन सपा की चुनौती कम होने वाली नहीं है। यदि सीट बसपा के खाते में आई तो भी शिवपाल गुट का प्रत्याशी मैदान में नजर आएगा और यदि सीट सपा को मिली तब तो लड़ाई और भी तगड़ी हो सकती है। सपाई ही दो धड़ों में बंटे नजर आ सकते हैं। फिलहाल पार्टी से जुड़े कुछ दिग्गज सपाई शिवपाल ही नहीं बल्कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की गतिविधि पर भी अपनी नजरें गढ़ाए हैं।
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शिवपाल सिंह यादव
बता दें कि बीते जिला पंचायत के चुनाव से ही समाजवादी पार्टी जिले में भीतरघात से जूझ रही है। जिस कारण सपा दो धड़ों में बंटी नजर आ रही है। हालात ये हैं कि कुछ दिग्गज सपाइयों ने तो पार्टी ही छोड़ दी और दूसरे दलों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बाकी जो बड़े नेता रह गए हैं, वे भी मंथन की स्थिति से गुजर रहे थे, ऐसे में शिवपाल ने भी पार्टी छोड़कर उन नेताओं की सक्रियता को एक बार फिर तेज कर दिया है।
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शिवपाल सिंह यादव
अखिलेश गुट से अलग ये नेता लखनऊ से दिल्ली और इटावा से मैनपुरी तक फोन मिलाकर पल-पल की जानकारी बटोर रहे हैं। कुछ युवा सपाई तो अभी तक शिवपाल का जन्मदिन तक मनाते रहे हैं, उनके सामने भी फैसले की घड़ी है।
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शिवपाल सिंह यादव
उस पर पार्टी से नाराज चल रहे नेताओं का कहना है कि उनकी राजनीति मुलायम सिंह की देन है, इसलिए वे अपना फैसला नेता जी का रुख देखने के बाद ही करेंगे। लिहाजा जल्द ही जिले की सपा में कोई नया करिश्मा भी दिख सकता है, जो कि आने वाले लोकसभा चुनाव पर भी असर डाल सकता है।
हालांकि पार्टी के जिलाध्यक्ष वीरपाल दादी का कहना है कि अधिकांश लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ हैं तो वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष नन्हू राजा के मुताबिक, जो नेता अभी भी पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं, वे भी चुनाव का वक्त आते आते समाजवादी झंडे के नीचे ही खड़े नजर आएंगे।