साल का पहला शनि प्रदोष दो फरवरी को है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शुरू किया गया व्रत, पूजन या जाप अत्यधिक फलदायी होता है। यह भी मान्यता है कि साढ़ेसाती से ग्रसित लोग यदि शनि प्रदोष के दिन छाया दान करके रुद्राभिषेक करवाएं तो लाभ मिलता है। इस साल दो ही शनि प्रदोष हैं। दूसरा और आखिरी नौ नवंबर को है।
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आचार्य आदित्य पांडेय और आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि प्रदोष तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं और शनि देव के भी आराध्य देव भगवान शिव हैं। ऐसे में शनि ग्रह संबंधी कोई जाप, पूजन या शिवजी संबंधित कोई भी जाप, पूजन या व्रत शनि प्रदोष के दिन शुरू किया जाता है तो उसका फल जीवन पर्यंत मिलता है।
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धर्म सिंधु के अनुसार शनि प्रदोष सोम प्रदोष के समान ही शक्तिशाली माना गया है। यदि श्रावण मास में इसका सहयोग हो जाए तो यह सर्वाधिक लाभप्रद होता है। शनि प्रदोष के दिन काले तिल, काली उड़द या शमी पत्र भगवान शिवजी पर अर्पित करने चाहिए।
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ऐसे करें पूजन
- सबसे पहले भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करें
- इसके बाद काले तिल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं
- दीपक जलाते ही प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें
- कथा समाप्त होने के बाद भगवान शिव की आरती करें
- रात में व्रत का पारण करें
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प्रदोष व्रत देता है लंबी आयु
ऐसी मान्यता है कि प्रदोषकाल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और इस पावन तिथि पर भगवान शिव की पूजा की जाए तो वे बहुत जल्द प्रसन्न होकर भक्तों को सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं। धर्म और मोक्ष से जोड़ने वाले अर्थ और काम से मुक्त करने वाले इस व्रत को धार्मिक शास्त्रों में अरोग्य और लंबी आयु देने वाला माना गया है।
शनि प्रदोष का फल
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। व्यक्ति को कर्ज से भी मुक्ति मिलती है। बता दें प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। माता पार्वती व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि का वरदान देती हैं।